विवेक को विश्व कप में पदक का सूखा खत्म करने के लिए अशोक कुमार से मिले गुरुमंत्र पर भरोसा
विवेक को विश्व कप में पदक का सूखा खत्म करने के लिए अशोक कुमार से मिले गुरुमंत्र पर भरोसा
(मोना पार्थसारथी)
नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) दो ओलंपिक पदक जीत चुके विवेक सागर प्रसाद को विश्व कप से पहले भारत की एकमात्र खिताबी जीत के नायक और उनके गुरू अशोक ध्यानचंद से ‘गुरूमंत्र’ मिला है कि गोल करने की बजाय गोल बनाने पर अधिक फोकस रखना ।
भारत ने अब तक सिर्फ एक बार 1975 में विश्व कप जीता है जिसमें फाइनल में पाकिस्तान पर 2 . 1 से मिली जीत के नायक थे अशोक जो विवेक के गुरू और मार्गदर्शक भी हैं । वह 1971 विश्व कप में कांस्य और 1973 में रजत पदक जीतने वाली टीम के भी सदस्य थे ।
यह पूछने पर कि नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे टूर्नामेंट से पहले उनसे क्या टिप्स लिये हैं, तोक्यो और पेरिस ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता 26 वर्ष के इस मिडफील्डर ने कहा ,‘‘ उन्होंने इतना ही कहा कि गोल मारने से ज्यादा अहम होता है गोल कराने वाला । चूंकि मैं मिडफील्ड में खेलता हूं तो उन्होंने मुझे अच्छे मूव बनाकर गोल के सूत्रधार बनने की सलाह दी ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ उन्होंने यह भी कहा कि विश्व कप में अपने आपको पहले से भांप लो कि क्या करना चाहते हो । अपने विरोधी को देख लो कि पोजिशनिंग क्या है और उसके हिसाब से रणनीति तय करो ।’’
अकोला में 2013 में एक स्थानीय टूर्नामेंट के दौरान अशोक कुमार ने विवेक को देखा और फिर भोपाल में अपनी अकादमी में बुलाया ।
मध्यप्रदेश के इटारसी के रहने वाले इस खिलाड़ी ने कहा ,‘‘मैने खेल की हर बारीकी उनसे सीखी । उन्होंने अभ्यास, फिटनेस में और मेंटोर के तौर पर मार्गदर्शन दिया और मेरे लिये चीजें आसान कर दी । मेरा फोकस भटकने नहीं दिया ।’’
विश्व कप की तैयारी के बारे में पूछने पर भारत के लिये 194 मैचों में 22 गोल कर चुके इस खिलाड़ी ने कहा ,‘‘ विश्व कप 1975 के विजेताओं का नाम हम बचपन से सुनते आ रहे हैं । पुराने खिलाड़ियों से बात करें तो वे यही कहते हैं कि विश्व कप ट्रॉफी उठाने का अलग ही अनुभव होता है ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘हम पोडियम फिनिश का लक्ष्य लेकर ही चल रहे हैं । पिछले कुछ साल में हमने कई मिथक तोड़े हैं ,चाहे वह 41 साल बाद ओलंपिक पदक जीतना हो या बड़ी टीमों के खिलाफ मुकाबले जीतने हों या गोल स्कोरिंग हो । टीम में विश्वास है और उसे लेकर ही हर दिन अभ्यास कर रहे हैं ।’’
विवेक ने बताया कि खिलाड़ियों के बीच आपस में भी बात होती है कि वे सिर्फ भागीदारी के लिये नहीं बल्कि जीतने के इरादे से जा रहे हैं ।
उन्होंने कहा ,‘‘तोक्यो ओलंपिक से पहले सीनियर खिलाड़ियों ने अपने अनुभव साझा किये थे और हम इस बारे में सोच ही नहीं रहे थे कि 41 साल से पदक नहीं जीते हैं । हम बस ये सोचकर गए थे कि अपने नाम के पीछे ओलंपियन लिखवाने नहीं बल्कि पदक जीतने जाते हैं ।’’
अब खुद काफी अनुभवी हो चुके इस खिलाड़ी ने आगे कहा ,‘‘ विश्व कप से पहले भी हम अपने अनुभव युवा खिलाड़ियों से साझा कर रहे हैं । विश्व कप में हमने 50 साल से पदक नहीं जीता है लेकिन यह दबाव नहीं बल्कि हमारी जिम्मेदारी है कि इस इंतजार को खत्म करें ।’’
उन्होंने कहा कि विश्व कप में किसी भी टीम को हलके में नहीं लिया जा सकता लिहाजा भारतीय टीम अपनी ताकत पर फोकस करके खेलेगी ।
विवेक ने कहा ,‘‘ इतिहास बीती बात है लेकिन अब अच्छा खेलने पर हम भी इतिहास में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं । हम मैच दर मैच रणनीति बनायेंगे और हर विरोधी टीम के हिसाब से खेलेंगे । अपनी ताकत पर फोकस करने की कोशिश करेंगे क्योंकि विश्व कप में कोई टीम कमजोर नहीं होती ।’’
आठ साल पहले भारतीय टीम में पदार्पण करने वाले विवेक का मानना है कि फिटनेस के मानदंडों पर भारत शीर्ष टीमों से कम नहीं है और विश्व कप के तुरंत बाद एशियाड खेलने में दिक्कत नहीं होगी ।
उन्होंने कहा ,‘‘ हम फिटनेस पर काफी मेहनत कर रहे हैं और तैयारियों के दम पर विश्व कप के बाद एशियाई खेलों में अच्छे प्रदर्शन का यकीन है । हमने पहले भी लगातार टूर्नामेंट खेले हैं और जीते भी हैं ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ योयो टेस्ट में 21 . 5 से ऊपर का लक्ष्य था जिस पर पूरी टीम खरी उतरी ।वहीं 16 लेन बेसलाइन टेस्ट में अंडर 5.25 स्कोर रहा है जो बहुत अच्छा माना जाता है ।’’
फील्ड हॉकी में 16 लेन/पिच-लंबाई वाला बेसलाइन टेस्ट एक कंडीशनिंग मूल्यांकन है, जिसमें खिलाड़ी एरोबिक क्षमता को मापने के लिए पिच या रिंक की बाउंड्री की पूरी लंबाई को 16 बार जितनी तेजी से हो सके, दौड़ते या स्केट करते हैं।
2016 में लखनऊ में हुए जूनियर विश्व कप से ठीक पहले कंधे की चोट के कारण वह टीम से बाहर हो गए थे। भारत ने वहां खिताब जीता था । फिर 2021 में विवेक की कप्तानी में इसी टूर्नामेंट में भारतीय टीम चौथे स्थान पर रही थी ।
उन्होंने कहा,‘‘ मैं 16 साल का ही था और कंधे में चोट के कारण 2016 जूनियर विश्व कप से पहले छह महीने टीम से बाहर रहा था । इससे भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी और काफी सोचने लगा था। अब लगता है कि यह दौर भी खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा होता है और इससे काफी कुछ सीखने को मिलता है ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ जूनियर विश्व कप 2021 ओलंपिक के दो महीने बाद ही हुआ था जिसमें हमने अच्छा खेला । जूनियर . सीनियर स्तर के अनुभव से मानसिक दृढता मिली । मैं अपने अनुभव युवाओं से साझा करता हूं और कहता हूं कि उन चीजों के बारे में मत सोचें जो आपके नियंत्रण में नहीं है ।’’
भाषा मोना
पंत
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