धमधा: ट्रैक्टर-ट्रॉली और ईट भट्टे में छिपाकर रखी गई थी गायों की लाशें

धमधा: ट्रैक्टर-ट्रॉली और ईट भट्टे में छिपाकर रखी गई थी गायों की लाशें

धमधा: ट्रैक्टर-ट्रॉली और ईट भट्टे में छिपाकर रखी गई थी गायों की लाशें
Modified Date: November 29, 2022 / 08:52 pm IST
Published Date: August 19, 2017 6:04 am IST

 गायों का गुनहगार, रक्षक बना भक्षक !

गायों को लेकर जारी सियासत के बीच छत्तीसगढ़ के धमधा से एक ऐसी खबर आई है. जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है. दरअसल यहां के राजपुर में संचालित शगुन गौ शाला में सैकड़ों गायों ने कुपोषण के चलते दम तोड़ दिया है. हालांकि प्रशासन 29 गायों के मौत की ही पुष्टि कर रहा है. सनसनीखेज बात ये है कि गायों की मौत उस गौ शाला में हुई है. जिसका संचालक ना केवल भाजपा का पदाधिकारी है. बल्कि इस गौ शाला को सालाना लाखों का अनुदान भी मिलता है. मामला तूल पकड़ने के बाद गौ शाला संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया है.

दुर्ग के धमधा के राजपुर की ये वही गौ शाला है. जो अब गायों की कब्रिस्तान में तब्दील हो चुकी है. प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक यहां अब तक 29 मृत गायों को निकाला गया है. जिन्हें मरने के बाद गौ शाला संचालक ने जमीन में दफन कर दिया था. लेकिन गांव वालों के मुताबिक गायों के मरने का आंकड़ा प्रशासनिक आंकड़े से कई गुना ज्यादा है. खास बात ये है कि ये सब उस शगुन गौ शाला में हुआ है. जिसका संचालक हरीश वर्मा नाम का वो शख्स है. जो भाजपा जामुल मंडल का उपाध्यक्ष भी है. अपने राजनीतिक पहुंच के चलते इस गौशाला को 2010 से अब तक 1 करोड़ का अनुदान भी हासिल कर चुका है. गायों के खान-पान के नाम पर हर माह लाखों का अनुदान पाने के बाद भी गायों की हालत कैसी है. उसे गायों को देखकर ही समझा जा सकता है. पोस्ट मार्टम रिपोर्ट से भी खुलासा हुआ है कि गायों की मौत कुपोषण से हुई है और मामला तूल पकड़े के बाद गौशाला संचालक हरीश वर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है.

गायों की मौत के पीछे दरअसल गौ शाला संचालक के नापाक मंसूबे भी छिपे हैं. ग्रामीणों की मानें तो शगुन गौशाला में 220 गायो को रखने की क्षमता थी लेकिन यहाँ 900 से ज्यादा गायों को रखा गया था जिनमे से अब केवल करीब साढ़े पांच सौ गाय ही जिंदा बची है और ग्रामीणों के दावों पर यकीन करें तो बाकी गायों को भी अपनी करतूत छिपाने के लिए दफना दिया गया है.ग्रामीणों का तो यहां तक कहना है कि गौ शाला संचालक दरअसल बीफ कारोबार से जुड़ा है और गौ रक्षकों के सक्रिय होने के चलते जब गायों को बूचड़खाने भेजने में दिक्कत आने लगी तो उसने गायों को खाना-पीना देना छोड़ दिया. जिससे गायों की मौत होने लगी.

लेकिन गौशाला अध्यक्ष की माने तो ये नौबत गौ सेवा आयोग से फंड नहीं मिलने की वजह से आई है. वहीं गायों के मौत के पीछे वो गौशाला की दिवार गिरने की बेतुकी दलील भी दे रहा है. गौ शाला संचालक भले कुछ भी दलील दे लेकिन उसकी इस करतूत से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है जिसे देखते हुए गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. वहीं सीएम रमन सिंह भी एक्शन में आए हैं और उन्होंने पूरे मामले की रिपोर्ट मंगाई है. गायों के मौत के बाद सरकार और प्रशासन अब भले हरकत में आया है. लेकिन इस घटना ने गौ शालाओं की दुर्दशा को उजागर कर दिया है.

 


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