एसयूवी-वाजे मामले में सच पता लगाने में केंद्र को मदद करनी चाहिए : राज ठाकरे

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एसयूवी-वाजे मामले में सच पता लगाने में केंद्र को मदद करनी चाहिए : राज ठाकरे

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  • Publish Date - March 21, 2021 / 10:34 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:32 PM IST

मुंबई, 21 मार्च (भाषा) मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने पिछले महीने यहां उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास मिली विस्फोटकों से भरी कार के पीछे की सच्चाई का पता लगाने के लिए रविवार को केंद्र से हस्तक्षेप करने के लिए कहा।

ठाकरे ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार इस मामले में कई बुनियादी तथ्यों के बारे में बताने में असमर्थ रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘विस्फोटकों का मामला केवल परमबीर सिंह (पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त) और सचिन वाजे (मुंबई पुलिस का निलंबित अधिकारी) का ही नहीं है। पुलिस का विस्फोटकों को रखना या ऐसा करने के लिए कहा जाना छोटी बात नहीं है।’’

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख ने कहा कि केंद्र को मामले में सच का पता लगाने में मदद करनी चाहिए। उन बुनियादी सवालों का जवाब मिलना चाहिए कि विस्फोटकों से भरी कार किसने खड़ी की और किसके निर्देशों पर यह किया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘मूल मुद्दा भूलना नहीं चाहिए, वरना यह मामला भी ऐसा ही हो जाएगा जैसा कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला।’’

ठाकरे ने कहा कि इसकी गुंजाइश न के बराबर है कि वाजे बिना किसी के कहे अंबानी के घर के पास विस्फोटकों से भरा वाहन खड़ा कर दें।

उन्होंने पूछा कि राज्य सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट क्यों नहीं किया है कि परमबीर सिंह को क्यों हटाया गया।

उन्होंने पूछा, ‘‘क्या इसके पीछे की वजह यह है कि उनका संबंध वाहन को खड़ा करने में है? और अगर सिंह इसमें शामिल हैं तो राज्य सरकार ने उनका तबादला करने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? ’’

मनसे नेता ने कहा कि मुकेश अंबानी और उद्धव ठाकरे के बीच बेहद अच्छे संबंध हैं।

ठाकरे ने कार में मिले धमकी भरे पत्र को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘क्या अंबानी से पैसा वसूलना इतना आसान है?’’

उन्होंने गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लगे आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उनका इस्तीफा मांगा।

इस बीच देशमुख के खिलाफ आरोपों पर पुणे में एक प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए प्रदेश भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि सरकार के पास सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक आधार नहीं बचा है।

भाषा गोला दिलीप

दिलीप