धान खरीदी शुरू होने से पहले मंडराया संकट, कस्टम मिलिंग का भुगतान और बारदाना की कमी बनी वजह

धान खरीदी शुरू होने से पहले मंडराया संकट, कस्टम मिलिंग का भुगतान और बारदाना की कमी बनी वजह

धान खरीदी शुरू होने से पहले मंडराया संकट, कस्टम मिलिंग का भुगतान और बारदाना की कमी बनी वजह
Modified Date: November 29, 2022 / 08:20 pm IST
Published Date: November 24, 2020 12:11 pm IST

रायपुर। धान संग्रहण और उपार्जन केंद्र में पड़ा 50 लाख क्विंटल धान और बारदाने की कमी सरकार के लिए धान खरीदी की सबसे बड़ी चुनौती है । बारदाने को कमी से निपटने के लिए सरकार प्लास्टिक के बारदाने की खरीदी का एक टेंडर जारी कर चुकी है दूसरा टेंडर भी जारी करने की तैयारी में है । इधर पिछले कस्टम मिलिंग का भुगतान करे बगैर राइसमिलर्स पर 15 रुपए में बारदाना देने और कस्टम मिलिंग के लिए धान उठाव के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

ये भी पढ़ें: नीतीश कुमार के सीएम बनते ही इस शख्स ने काट दी अपने हाथ की उंगली, अब तक काट चु…

वहीं कस्टम मिलिंग का पिछला भुगतान नहीं होने पर इस बार राइसमिलर्स कस्टम मिलिंग के लिए बैंक गारंटी के लिए पैसा जमा नहीं कर पा रहे हैं। राइसमिलर्स का कहना है कि उन्होंने अपने इस समस्या से खाद्य मंत्री और विभाग के अफसरों को अवगत करा दिया है लेकिन इसके बावजूद भी उन पर कस्टम मिलिंग के लिए धान उठाने और 15 रुपए के हिसाब से बारदाना देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

ये भी पढ़ें: राज्यपाल मिश्र की कोरोना से बचाव के लिए सजग, सतर्क रहने की अपील

इस मामले पर खाद्य मंत्री अमरजीत भगत का कहना है कि अब तक राइसमिलर्स ने उनकी समस्याओं से उन्हें अवगत नहीं कराया है, अगर कस्टम मिलिंग का पैसा बकाया है तो उसे जल्द से जल्द दिलवाने में उनकी मदद करेंगे । वहीं भाजपा इसके लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रही है ।

ये भी पढ़ें:  पराली जलाने की समस्या से निजात पाने के लिए बायो-डिकम्पोजर के छिड़का…


लेखक के बारे में

डॉ.अनिल शुक्ला, 2019 से CG-MP के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 के डिजिटल ​डिपार्टमेंट में Senior Associate Producer हैं। 2024 में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय से Journalism and Mass Communication विषय में Ph.D अवॉर्ड हो चुके हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से M.Phil और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से M.sc (EM) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। जहां प्रावीण्य सूची में प्रथम आने के लिए तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिंदी साहित्य में एम.ए किया। इनके अलावा PGDJMC और PGDRD एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया। डॉ.अनिल शुक्ला ने मीडिया एवं जनसंचार से संबंधित दर्जन भर से अधिक कार्यशाला, सेमीनार, मीडिया संगो​ष्ठी में सहभागिता की। इनके तमाम प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख और शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ.अनिल शुक्ला को रिपोर्टर, एंकर और कंटेट राइटर के बतौर मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इस पर मेल आईडी पर संपर्क करें anilshuklamedia@gmail.com