आजादी के 70 साल बाद भी खेत में बैल की तरह जुतने को मजबूर किसान

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आजादी के 70 साल बाद भी खेत में बैल की तरह जुतने को मजबूर किसान

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  • Publish Date - August 13, 2017 / 10:30 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 07:45 PM IST

 

मध्यप्रदेश सरकार किसानों के उत्थान के लाभ दावे करें..लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है…किसान आज भी भगवान भरोसे अपने लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर रहा है…डिंडौरी में एक किसान को खेत जोतने के लिए हल में बैलों की जगह अपने दो बेटों को जोत दिया…वजह थी किसान के एक बैल का मर जाना।

शहपुरा विकासखंड के मोहनी गांव में गोहरा किसान का बैल नागपंचमी वाले दिन मर गया….एक बैल से खेत की जुताई नहीं हो सकती थी और बोवाई का समय निकला जा रहा था..ऐसे में किसान ने अपने बेटों के साथ मिलकर खुद ही खेत की जुताई कर दी…वहीं जब इस मामले में कृषि विभागीय अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने विभाग की ओर से बैल देने की योजना बंद हो जाने की जानकारी दी..साथ ही कहा कि यदि किसान ने विभाग को जुताई के बारे में जानकारी दी होती तो सरकारी मदद से खेत जोतने के लिए ट्रैक्टर मिल जाता…इस योजना के तहत कोई भी किसान 4 हेक्टेयर तक खेत जुतवा सकता है।