वर्तमान प्रतिस्पर्धा के दौर में स्वयं को किसी भी व्यावसाय में स्थापित कर घर की माली हालत में सुधार लाना किसी भी बेरोजगार यवुक के लिए बहुत बड़ी कामयाबी है। कामयाबी हासिल करने वाला यदि कोई दिव्यांग हो तो उनका यह कार्य दूसरों के लिए हमेशा प्रेरणादायी है। ऐसा ही एक कामयाब युवक भागीरथी भी है। जिसकी परिवार की माली हालत सुधारने में किराना व्यवसाय सहायक रही है। शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जागरूक युवाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजनाओं से आर्थिक मदद मिल रही है। ऐसा ही एक महत्वकांक्षी योजना अन्य पिछड़ा वर्ग जनरल लोन, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति के माध्यम से संचालित की जा रही है।
योजना के तहत चयनित बेमेतरा तहसील के ग्राम केवाची निवासी भागीरथी निर्मलकर पिता मानसिंग निर्मलकर को किराना व्यवसाय हेतु जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति द्वारा एक लाख रूपए ऋण राशि प्रदान किया गया है। जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति बेमेतरा द्वारा जिले के उत्साही युवक-युवतियों जिसमें महिलाओं एवं दिव्यांगों को प्राथमिकता देते हुए स्वरोजगार स्थापित करने के लिए मदद देकर उनके सपनों को साकार करने की दिशा में सकारात्मक पहल की जा रही है।
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ग्राम केंवाची निवासी भागीरथी निर्मलकर 8 वीं कक्षा तक शिक्षित है। परिवार की माली हालत ठीक नहीं होने के कारण भागीरथी आगे की पढ़ाई नहीं कर पाये। आज भागीरथी अंत्यावसायी विभाग से लोन लेकर किराना व्यावसाय के जरिए स्वयं व परिवारवालों का भरण-पोषण बखूबी कर रहा है। कृषि भूमि कम होने (मात्र 45 डिसमिल जमीन) और परिवार के सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण पालन पोषण सही तरीके से संभव नहीं हो पा रहा था। एक गांव से दूसरे गांव की गली-मुहल्लों में साइकिल से ब्रेड बेचकर परिवार का पालन-पोषण भागीरथी के लिए परेशानी का सबब था। इसलिए परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करना उसके लिए आवश्यक था। सोंढ़ जनसमस्या निवारण शिविर में भागीरथी को अन्य पिछड़ा वर्ग की जनरल लोन योजना के संबंध में विस्तृत जानकारी जिला अंत्यावसायी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रवीण लाटा से प्राप्त हुई। योजना के बारे में भली-भांति समझकर भागीरथी ने अंत्यावसायी विभाग के जिला कार्यालय बेमेतरा से संपर्क कर ऋण लेने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन पत्र पर त्वरित कार्यवाही कर चयन समिति में उसका चयन अन्य पिछड़ा वर्ग की जनरल लोन योजना में हुआ। जिसके माध्यम से किराना एवं जनरल व्यवसाय करने हेतु भागीरथी के बैंक खाते में आर.टी.जी.एस. से एक लाख रूपए अंतरण किया गया। राशि स्वीकृत होने पर भागीरथी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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परिवार के अन्य सदस्य भी खुश हुए। भागीरथी ने स्वीकृत ऋण राशि प्राप्त करने के पश्चात समीप के ही ग्राम बैजी में 1500 रूपए प्रतिमाह में किराये की दुकान में सभी प्रकार की सामग्री, सौंदर्य प्रसाधन, खाद्य सामाग्री, तेल, नमक, मिर्च, आलू, प्याज, अदरक, लहसुन के साथ ही फ्रीजर रखकर कोल्ड ड्रिंक्स, पानी बोतल, आइसक्रीम के अलावा मोबाईल रिचार्ज रखना प्रारंभ किया। दुकान से स्थानीय लोगों की जरूरत को देखते हुए उनके मांग के अनुसार ही सामाग्री उपलब्ध कराई जाती है। एक छोटी सी दुकान में जरूरत के सभी सामान मिलने पर गांव के साथ ही आसपास के गांव के लोग सामग्री लेने आने लगे, इस तरह भागीरथी के दुकान में सामाग्रियों की बिक्री अच्छी होने लगी। अब भागीरथी को गांव-गांव घुमने के बजाय अपनी दुकान में बैठकर ही प्रतिदिन 600 से 700 रूपए के व्यवसाय से लगभग सात से आठ हजार रूपए की आमदनी प्रतिमाह होने लगी है। उनके द्वारा ऋण की किश्त राशि का भुगतान प्रतिमाह किया जा रहा है। भागीरथी का भविष्य अब सुरक्षित है, दिव्यांग होने के बावजूद भी भागीरथी अपने पैरों पर खड़ा होकर गांव के अन्य लोगों के लिये प्रेरणा का कार्य कर रहा है।
वेब टीम IBC24