जनता मांगे हिसाब के सफर की शुरुआत करते हैं छत्तीसगढ़ की कोरबा विधानसभा से, सियासी बिसात और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर।
ऊर्जा नगरी के नाम से मशहूर
कुल मतदाता-1 लाख 74 हजार 303
पुरुष मतदाता-94 हजार 145
महिला मतदाता-80 हजार 198
वर्तमान में विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा
जयसिंह अग्रवाल हैं कांग्रेस विधायक
कोरबा विधानसभा की सियासत
कोरबा विधानसभा सीट अस्तित्व में आने के बाद से कांग्रेस के कब्जे में है। इस सीट पर कांग्रेस लगातार दो विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करती है आ रही है। तो वहीं बीजेपी अब भी एक जीत की तलाश में है।
कोरबा विधानसभा में कांग्रेस की पकड़ मजबूत दिखाई देती है। वो इसलिए क्योंकि बीते दो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस जीत का परचम लहराती आ रही है। 2008 के चुनाव में कांग्रेस के जयसिंह अग्रवाल ने बीजेपी के बनवारी लाल अग्रवाल को शिकस्त दी थी। इसके बाद 2013 में एक बार फिर जयसिंह अग्रवाल ने जीत दर्ज करते हुए बीजेपी के जोगेश लांबा को मात दी। अब एक बार फिर चुनाव नजदीक हैं तो जहां कांग्रेस अपनी जीत का सिलसिला जारी रखने की कोशिशों में जुट गई है तो वहीं बीजेपी कांग्रेस के किले में सेंध लगाने की जुगत में है।
इसके साथ ही विधायक की टिकट के दावेदार भी सक्रिय हो गए हैं। बात कांग्रेस की करें तो वर्तमान विधायक जयसिंह अग्रवाल सबसे प्रबल दावेदार हैं। अब बात बीजेपी की करें तो दावेदारों की लंबी लाइन है। जिसमें सबसे आगे हैं पूर्व महापौर जोगेश लांबा। इसके अलावा विकास महतो भी दावेदार हैं। नवीन पटेल, अशोक चावलानी, देवेंद्र पांडे, और बनवारी लाल अग्रवाल भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं। जहां बीजेपी और कांग्रेस ये तय नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर किस को मैदान में उतारा जाए। लेकिन इस बीच JCCJ ने रामसिंह अग्रवाल को उम्मीदवार घोषित कर दिया है ।
कोरबा विधानसभा के मुद्दे
कहने को तो कोरबा को उद्योगों की नगरी कहा जाता है। लेकिन इसके बाद भी बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं लोग। प्रदूषण के चलते हालत ये है कि ना हवा शुद्ध है और ना ही पानी।
कोरबा में स्थापित ये उद्योग रोजगार तो नहीं दे पा रहे हैं। लेकिन इन उद्योगों से प्रदूषण जरुर फैल रहा है। हालत ये की हवा से लेकर पानी तक सब प्रदूषित है। पॉवर प्लांटों से निकलने वाली राखड़ से खेती की जमीन भी बंजर होने लगी है। तो वहीं हसदेव नदी में भी जहर घुल रहा है। विधानसभा क्षेत्र में उद्योगों की वजह से पेयजल संकट भी एक बड़ी समस्या है।
गर्मियों में तो लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाते हैं। ऊर्जा नगरी कहे जाने वाले कोरबा में एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज की मांग भी अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इसके अलावा सड़कों की भी हालत खराब है। कई गांव तो अब तक सड़क के इंतजार में हैं..शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की भी हालत खराब है। गांवों की तो छोड़िए जिला अस्पताल में तक विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। इन सब समस्याओं के बीच अतिक्रमण और बेतरतीब ट्रैफिक से भी दो-चार हो रहे हैं लोग ।
वेब डेस्क, IBC24