मप्र में बीजेपी-कांग्रेस के बागियों ने बढ़ाई नेताओं की परेशानी, मानने को तैयार नहीं
मप्र में बीजेपी-कांग्रेस के बागियों ने बढ़ाई नेताओं की परेशानी, मानने को तैयार नहीं
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में नाम वापसी की आखिरी तारीख यानी 14 नवंबर को सिर्फ एक दिन बचा है। लेकिन अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंककर चुनावी मैदान में कूदे बागी वापस नहीं लौटे हैं। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन जमा करने वाले बागियों को मनाने के लिए दोनों दल जुटे हुए हैं। इक्का-दुक्का जरूर मान गए हैं लेकिन अधिकांश बागी ऐसे हैं जो नेताओं के एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बाद भी मानने को तैयार नहीं।
मध्य प्रदेश में बीजेपी की चौथी बार वापसी और कांग्रेस की सरकार बनने के दावों के बीच में बागी बड़ी बाधा बनकर खड़े हो गए हैं। बागियों के चुनावी मैदान में उतरने से दोनों दलों की 25 से अधिक सीटों के समीकरण गड़बड़ा गए हैं। कई जगह तो बीजेपी-कांग्रेस की जगह बागी फर्स्ट फ्रंट पर मुकाबला करते देखे जा रहे हैं। हालांकि इन बागियों को मनाने के लिए दोनों दल जुटे हुए हैं। लेकिन नाम वापसी में सिर्फ एक दिन का समय बचने से बीजेपी-कांग्रेस का सिरदर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा।
बीजेपी के बागी बीजेपी बुंदेलखंड प्राधिकरण के अध्यक्ष, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद डॉ रामकृष्ण कुसमरिया ने वित्तमंत्री जयंत मलैया की सीट दमोह से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भरकर बीजेपी की मुश्किल बढ़ा दी हैं। कुसमरिया ने दमोह के साथ पथरिया सीट से भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन जमा किया है। भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेरिया ने बागी होकर जबलपुर उत्तर सीट से निर्दलीय फॉर्म जमा किया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने धीरज पटेरिया को मनाने की कोशिश की लेकिन धीरज ने फॉर्म वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है।
ग्वालियर की पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता ने बागी होकर ग्वालियर दक्षिण सीट से निर्दलीय नामांकन जमा किया है। भोपाल हुजूर विधानसभा से पूर्व विधायक जितेंद्र डागा मैदान में हैं। गुना की बमौरी सीट से शिवराज सरकार में मंत्री रहे केएल अग्रवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन जमा किया है। अग्रवाल भी नामांकन वापस लेने के लिए तैयार नहीं हैं। इधर, पार्टी दावा कर रही है कि अभी एक दिन बाकी है, सभी अपने हैं, उन्हें मना लिया जाएगा।
यह भी पढ़ें : नक्सलियों ने खेत में लगाया आईईडी, ब्लास्ट से बुजुर्ग की मौत
कांग्रेस की बात करें तो भोपाल मध्य से कांग्रेस के बागी रईस बबलू समाजवादी पार्टी से मैदान में हैं। इंदौर की विधानसभा नंबर पांच में कांग्रेस नेता छोटे यादव बागी होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। उज्जैन दक्षिण में जयसिंह दरबार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं। खरगोन की भगवानपुरा सीट से केदार डाबर बागी बनकर चुनौती दे रहे हैं। बड़वानी में बीजेपी नेता रहे राजेंद्र मंडलोई निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी जैसी ही कांग्रेस की स्थिति है लेकिन कांग्रेस का दावा है कि बागियों की फौज कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी में है और कांग्रेस तो अपनों को मना लेगी लेकिन बीजेपी में ऐसा नहीं हो सकेगा।
यह भी पढ़ें : सर्वे रिपोर्ट, पाकिस्तान में 70 फीसदी लोग नहीं जानते इंटरनेट क्या है
दोनों दलों के अपने-अपने तर्क हों लेकिन हकीकत ये कि मैदान में उतर चुके बागी पार्टी के शीर्ष नेताओं को भी तवज्जो नहीं दे रहे हैं। दोनों दलों के पास सिर्फ बुधवार दोपहर से पहले तक का समय है। इस बीच बागी नहीं माने तो दोनों दलों के चुनावी समीकरण गड़बड़ाना लाजिमी है।

Facebook


