नान फोन टेपिंग केस में आर के दुबे को झटका, हाईकोर्ट ने सुरक्षा की मांग ठुकराई
नान फोन टेपिंग केस में आर के दुबे को झटका, हाईकोर्ट ने सुरक्षा की मांग ठुकराई
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित आईपीएस मुकेश गुप्ता और एसपी रजनेश सिंह के खिलाफ एफआईआर के बाद एसीबी के अफसर आर के दुबे की याचिका का निपटारा हो गया है। दरअसल, दुबे ने शपथपत्र में यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि एसआईटी ने दबाव डालकर बयान लिया गया था। उन्होंने हाईकोर्ट में जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। उधर, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ईओडब्ल्यू के एसपी ने कहा है कि दुबे पर किसी प्रकार का दबाव बनाना का आरोप गलत है।

उल्लेखनीय है कि आईपीएस मुकेश गुप्ता और एसपी रजनेश सिंह के खिलाफ फोन टेपिंग और नान घोटाले के मामले में गुरुवार देर रात अपराध दर्ज किया गया था। उसके बाद ईओडब्ल्यू के निरीक्षक आरके दुबे ने कोर्ट में यह कहते हुए हलफनामा पेश किया कि ईओडब्ल्यू और एसआईटी के अफसरों ने दबाव डालकर दोनों वरिष्ठ अधिकारियों का नाम लिखवाया था।
दुबे ने अपनी जान का खतरा बताते हुए हाईकोर्ट में सुरक्षा के लिए गुहार लगाई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने दुबे की मांग को ठुकरा दिया और जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। इस संबध में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा है कि दुबे पर दबाव डाला गया था तो वे उनसे शिकायत कर सकते थे।कहा जा रहा है कि दुबे ने हलफनामा में यह भी लिखा है की पंडरी थाना के प्रभार में रहते हुए तत्कालीन अफसर के कहने पर ईओडब्ल्यू के दस्तावेजों में गलत ढ़ंग से एंट्री की थी। जबकि वो यह भी बयान दे चुके हैं कि मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह के कहने पर नान मामले में बैक डेट में इंट्री और फोन टेप कर कूटरचना में साथ दिया था.
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बता दें कि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए मुकेश गुप्ता और नारायणपुर एसपी रजनेश सिंह के खिलाफ 12 धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। प्रदेश का यह संभवत: पहला मामला है जिसमें पुलिस के वरिष्ठ अफसरों पर अपराध कायम किया गया है। दोनों के खिलाफ जिन धाराओं में पंजीबद्ध किया गया है, वे गंभीर और गैर जमानती हैं। मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह के खिलाफ धारा 166,166A (b),167,193,194,196,201,218,466,467,471 और 120 B के तहत मामला दर्ज किया गया है.आरोप है कि दोनों ने न्यायालय की प्रक्रिया को गुमराह करते हुए झूठे साक्ष्य गढ़ते हुए अपराधिक षड़यंत्र किया, कूटरचित दस्तावेज तैयार किए, अवैध रूप से फोन टैपिंग कराई है। यह सारा मामला बहुचर्चित नान घोटाले मामले की जांच के दौरान सामने आया है जिसके लिए एसआईटी का गठन किया गया है। अदालत में चल रहे नान घोटाले प्रकरण को लेकर विधिक कार्यवाही में इस एफआईआर से असर पड़ सकता है।

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