रायपुर। छत्तीसगढ़ के माओवादियों के पास से विलायती रायफल जी 3 मिलने से पुलिस की नींद उड़ी हुई है। जानकार सूत्रों का कहना है कि इस तरह के हथियारों का उपयोग आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) के लड़ाके करते हैं। इसी जर्मन मेड जी-3 रायफल से एसआइ ने मध्य पूर्व के देशों में कोहराम मचाया था। ऐसे में माओवादियों के पास से विदेशी हथियार की बरामदगी से सवाल ठ रहे हैं कि हथियार पाने का सोर्स क्या है। जानकार यह भी बताते हैं कि जी 3 टाइप के रायफल का उपयोग देश की कोई भी सशस्त्र बल में नहीं किया जाता। नक्सलियों के पास अधिकतर हथियार सुरक्षा बलों से लूटे हुए ही है। शुरुआती जांच में कहा जा रहा है कि ये जर्मन मेड जी 3 की नकल हो सकती है। जानकारों का यह भी दावा है कि माओवादियों के विदेशी कनेक्शन के अब तक की जानकारी नहीं मिली है।
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माओवादियों के पास मिले जी 3 हथियार के एक पुर्जे खोलकर बारीकी से पड़ताल की जा रही है। इंटरनेट खंगाले और सुरक्षा के जानकारों से बात करने पर यह बात सामने आई है कि इस तरह के हथियार पाकिस्तानी सेना के पास हैं। जर्मन के हेकलर एंड कोच कंपनी का यह हथियार 50 से ज्यादा देशों के पास है। पाकिस्तान के अलावा बंग्लादेश, इंडोनेशिया, ईरान जैसे देशों के पास स्थानीय निर्माण का लाइसेंस है। इसके अलावा स्वीडन, ब्राजील, मैक्सिको, टर्की, पुर्तगाल, सोमालिया, नाइजर जैसे देश के पास ऐसे हथियार हैं।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद पश्चिम जर्मन ने यह घातक हथियार बनाया था। बताया जा रहा है कि इससे एक मिनट में 7.62 मिमी की 600 गोलियां दागी जा सकती है। इसकी कारगर रेंज 200 से 600 मीटर है।
वेब डेस्क, IBC24