रमन के गोठ- छत्तीसगढ़ विकासगढ़ तो जशपुर विकासगड़ी, ई-रिक्शा पर 50 फीसदी सब्सिडी का ऐलान 

रमन के गोठ- छत्तीसगढ़ विकासगढ़ तो जशपुर विकासगड़ी, ई-रिक्शा पर 50 फीसदी सब्सिडी का ऐलान 

रमन के गोठ- छत्तीसगढ़ विकासगढ़ तो जशपुर विकासगड़ी, ई-रिक्शा पर 50 फीसदी सब्सिडी का ऐलान 
Modified Date: November 29, 2022 / 08:23 pm IST
Published Date: May 13, 2018 7:27 am IST

रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से प्रसारित अपनी मासिक रेडियोवार्ता ’रमन के गोठ’ की 33वीं कड़ी में प्रदेश व्यापी विकास यात्रा का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा-विकास यात्रा जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही की जीती-जागती मिसाल है।  डॉ. रमन सिंह ने रेडियो श्रोताओं से कहा-एक जमाना था, जब लोग चुनाव होने के बाद नेता, मंत्री और मुख्यमंत्री आदि को खोजा करते थे। चुनाव जीतने वाला लौट के अपने मतदाताओं से भी नहीं मिलता था, लेकिन जबसे मैंने छत्तीसगढ़ में सरकार की बागडोर संभाली, तब से मेरा बड़ा सिद्धांत था-जनता से निकटता और जवाबदेही। मुख्यमंत्री निवास में जनदर्शन, ग्राम सुराज अभियान, नगर सुराज अभियान, किसान महोत्सव, बोनस तिहार जैसे अनेक तरीकों से मैंने और मेरी सरकार ने ज्यादा से ज्यादा समय जनता के बीच गुजारा।

मैंने तय किया था कि मुख्यमंत्री निवास के दरवाजे हमेशा जनता के लिए खुले रहेंगे और मुझे यह कहते हुए खुशी है कि यह सब करने में हम सफल हुए। मैंने यह तय किया कि हम जो कहेंगे वो करेंगे और उसकी पूरी जिम्मेदारी लेंगे। हमने जनता से पूछकर जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं को जानकर और समझकर विकास के काम किए। इसलिए जब हमारा कार्यकाल पूरा होने लगता है, तो हम जनता का सामने करने का साहस रखते हैं। विकास यात्रा इसी जवाबदेही की एक जीती-जागती मिसाल है।  इस वजह से की दंतेवाड़ा से विकास यात्रा की शुरूआत  मुख्यमंत्री ने विकास यात्रा की शुरूआत दंतेवाड़ा से करने के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा-छत्तीसगढ़ में दक्षिण बस्तर के विकास को सर्वाधिक प्राथमिकता देने की शुरू से ही हमारी रणनीति है। पहले सघन वनों से घिरे और दुर्गम अंचलों में अनेक कारणों से विकास की किरणें नहीं पहुंच पायी थी, जिसका लाभ स्वार्थी और विकास विरोधी तत्वों ने उठाया था। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में ई-रिक्शा खरीदने वालों को श्रम विभाग के माध्यम से 50 हजार रूपए का अनुदान देने की घोषणा की है। उन्होंने श्रोताओं से कहा-मैं आपको एक और खुशखबरी देना चाहता हूं कि पहले सभी जिलों में ई-रिक्शे के लिए सब्सिडी (अनुदान) का प्रावधान नहीं था। लेकिन अब कुल लागत का एक तिहाई यानी करीब 50 हजार रूपए की सब्सिडी की व्यवस्था की जा रही है, जिसका लाभ आप सभी को मिलेगा। 

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अप्रैल को बीजापुर जिले के प्रवास के दौरान भानुप्रतापपुर से दुर्ग तक रेल सेवा का शुभारंभ किया। इस तरह गुदुम से भानुप्रतापपुर  तक रेल लाइन और रेल्वे स्टेशन की शुरूआत इस बात का सुखद संकेत है कि अगले तीन-चार वर्ष में दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर रेल नेटवर्क का निर्माण पूरा हो जाएगा। इतना ही नहीं, बल्कि बस्तर को नियमित विमान सेवाओं से जोड़ने के लिए जगदलपुर हवाई अड्डे का विकास पूरा हो गया है।  उन्होंने कहा-बस्तर संभाग के सभी सात जिलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए ’बस्तर नेट’ परियोजना का काम भी पूर्णता की ओर है, जिसके प्रथम चरण का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था। यह 836 किलोमीटर का रिंग टाइप ऑप्टिकल फाईबर नेटवर्क इस बात का प्रतीक है कि बस्तर को अब कोई भी ताकत कभी सम्पर्क विहीन नहीं बना पाएगी। सड़क, रेल और वायु मार्ग के अलावा यह कनेक्टिविटी बस्तर को ज्ञान और रोजगार के नये अवसरों से भी सम्पन्न कर देगी। बस्तर अब ’टापू’ नहीं रहा, बल्कि यह हर तरह से और हर तरफ से जुड़ गया है, जिससे निश्चित तौर पर बस्तर की तकदीर और तस्वीर बदल जाएगी। यही वजह है कि मैंने विकास यात्रा की शुरूआत के लिए दंतेवाड़ा को चुना है, ताकि बस्तर को लेकर सारे भ्रांतियों का समापन हो जाए और दुनिया यह जान सके कि बस्तर की विकास यात्रा रफ्तार पकड़ चुकी है।  

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 उन्होंने ’रमन के गोठ’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा-इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के लगभग 45 लाख परिवारों को पांच लाख रूपए तक स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलेगा। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के 56 लाख परिवारों को वार्षिक 50 हजार रूपए तक निःशुल्क इलाज की सुविधा दी गई है, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को और पत्रकारों को 80 हजार रूपए तक इसकी सुविधा मिलेगी।  

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उन्होंने रेडियो श्रोताओं को यह भी बताया कि राज्य के उत्तरी अंचल या सरगुजा संभाग को इस बात का श्रेय जाता है कि वहां से नक्सलवाद के खात्मे की शुरूआत हुई। बहुत विस्तृत इस संभाग में प्रशासनिक कसावट के लिए दो नये जिलों-बलरामपुर-रामानुजगंज और सूरजपुर का गठन किया गया। सरगुजा में विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, लाइवलीहुड कॉलेज आदि के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं सहित रोजगार सृजन में तेजी आयी है। डॉ. रमन सिंह ने कहा-इस संभाग के जशपुर जिले में पहले मानव तस्करी बहुत बड़े पैमाने पर होती थी। लोग काम की तलाश में दूसरे प्रदेशों में जाते थे, या उन्हें ले जाया जाता था, लेकिन आज जशपुर जिला स्किल केपिटल (कौशल राजधानी) के रूप में और ’विकासगड़ी’ के रूप में अपनी नई पहचान बनाने में सफल हुआ है, जहां विगत तीन वर्ष में 25 हजार से ज्यादा युवाओं को कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण दिया गया और इनमें से 20 हजार लोगों के प्लेसमेंट में भी सफलता मिली। उन्होंने दावे के साथ कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ यदि ’विकासगढ़’ बना है तो जशपुर जिला ’विकासगड़ी’। इसमें किसी को भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए।  डॉ. सिंह ने कहा-इनमें से कुछ लोगों से मेरी फोन पर बात भी हुई है, जो बताते हैं कि वे अपनी जिन्दगी में आए बदलाव से बहुत खुश हैं। जशपुर के गांवों से निकले युवा बेंगलूरू, मुम्बई, पुणे और हैदराबाद आदि महानगरों में काम कर रहे हैं। डॉ. रमन सिंह ने जशपुर जिला प्रशासन द्वारा जिला खनिज न्यास संस्थान (डीएमएफ) की राशि से संचालित संकल्प संस्था की भी तारीफ की। उन्होंने रेडियोवार्ता में कहा कि इस संस्था के माध्यम से इस वर्ष 71 बच्चों ने संयुक्त इंजीनियरिंग मुख्य प्रवेश परीक्षा (जेईई-मेंस) में सफलता हासिल की है, जो अब आईआईटी और एनआईटी आदि संस्थाओं में प्रवेश लेंगे। डॉ. रमन सिंह ने आदिम जाति विकास विभाग द्वारा मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना के तहत संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों के बच्चों का भी उल्लेख किया और कहा कि प्रयास संस्थाओं में बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए शिक्षित-प्रशिक्षित किया जाता है। इस वर्ष प्रयास विद्यालयों से 112 युवाओं को सफलता मिली है, जिनमें अम्बिकापुर प्रयास विद्यालय के 16 बच्चे भी शामिल हैं। यही वजह है कि अब जशपुर में भी प्रयास विद्यालय खोलने का निर्णय लिया गया है।

 

 वेब डेस्क IBC24


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