BhuDEV App: भूकंप आने से पहले कैसे मिल जाता है अलर्ट? भारत का भूकंप चेतावनी सिस्टम कैसे बचाता है जान, जानें टेक्नोलॉजी का चौंकाने वाला सच!

BhuDEV App: भारत के हिमालयी क्षेत्र में एक भूकंप अर्ली वार्मिंग सिस्टम काम कर रहा है। यह सिस्टम भूकंप के शुरुआती झटकों को तुरंत पहचान लेता है और लोगों के कुछ सेकेंड पहले चेतावनी भेज देता है। यह छोटा सा समय भी आपदा के दौरान जान बचाने में काफी मददगार साबित हो सकता है।

BhuDEV App: भूकंप आने से पहले कैसे मिल जाता है अलर्ट? भारत का भूकंप चेतावनी सिस्टम कैसे बचाता है जान, जानें टेक्नोलॉजी का चौंकाने वाला सच!

(BhuDEV App/ Image Credit: google)

Modified Date: June 26, 2026 / 04:56 pm IST
Published Date: June 26, 2026 4:31 pm IST
HIGHLIGHTS
  • भूकंप की भविष्यवाणी नहीं, सिर्फ अर्ली अलर्ट सिस्टम।
  • पी वेव को पहचानकर तुरंत चेतावनी भेजता है।
  • कुछ सेकंड पहले लोगों को सतर्क होने का समय मिलता है।

नई दिल्ली: BhuDEV App: दुनिया का कोई भी देश अभी तक भूकंप आने का सटीक समय पहले से नहीं बता सकता। लेकिन भारत ने हिमालयी क्षेत्र के लिए एक अर्थक्वेक अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित किया है। यह सिस्टम भूकंप शुरू होते ही तुरंत पहचान लेता है और कुछ सेकंड पहले लोगों को चेतावनी भेज देता है। इसका उद्देश्य भविष्यवाणी करना नहीं, बल्कि शुरुआती झटकों के बाद तेजी से अलर्ट देना है।

पी वेव पकड़कर भेजता है चेतावनी

भूकंप आने पर सबसे पहले पी वेव निकलती है जो कम नुकसान पहुंचाती है लेकिन तेज गति से चलती है। इसके बाद आने वाली वेव सबसे ज्यादा तबाही मचाती हैं। यह सिस्टम सबसे पहले पी वेव को पकड़ता है और फिर भूकंप की तीव्रता और केंद्र का अनुमान लगाकर अलर्ट भेज देता है। इससे लोगों और प्रशासन को तुरंत सुरक्षा कदम उठाने का समय मिल जाता है।

मोबाइल ऐप और सेंसर नेटवर्क से जुड़ा सिस्टम

भारत में यह सिस्टम मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों जैसे गढ़वाल और कुमाऊं में लगाया गया है। इसके लिए फॉल्ट लाइनों के पास सेंसर लगाए गए हैं जो भूकंप की शुरुआत को तुरंत पकड़ लेते हैं। आईआईटी रुड़की और उत्तराखंड सरकार ने मिलकर ‘भूदेव (BhuDEV)’ नाम का मोबाइल ऐप भी तैयार किया है जो लोगों को सीधे अलर्ट भेजता है।

कुछ सेकंड का समय भी बन सकता है जीवन रक्षक

इस सिस्टम से मिलने वाला समय इस बात पर निर्भर करता है कि कोई इलाका भूकंप के केंद्र से कितनी दूर है। दूर के इलाकों को कुछ सेकंड पहले चेतावनी मिल सकती है जबकि केंद्र के पास समय बहुत कम हो सकता है। यह सिस्टम जापान, ताइवान और अमेरिका जैसे देशों की तकनीक के समान दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।