सात साल के मासूम को जंजीरों से बांधकर रखते है मां-बाप

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सात साल के मासूम को जंजीरों से बांधकर रखते है मां-बाप

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  • Publish Date - August 15, 2017 / 03:15 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:34 PM IST

 

आजाद भारत मे गुलामों की तरह जकडा सात साल का मासूम नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र के टूईयापानी गांव है जिसे उसके ही माता पिता ने पिछले पांच सालों से रस्सियों से कैद करके रखा है पर अब ये सवाल भी उठना लाजमी है कि कोई भला अपने ही कलेजे के टुकड़े को क्यों यू कैद करेगा तो अब आप इसके पीछे की वजह भी सुन लीजिए दरसल मासूम दीपक अज्ञात बीमारी से ग्रसित है गरीबी में बसर कर किसी तरह दो वक्त की रोटी कमाने वाले माता पिता के पास इतना पैसा नही की वो अपने इस कुल के चिराग का इलाज करा सके और उसे आजादी की खुली सांस दे सके क्योंकि जब जब परिजनों ने उसे कैद से आजाद किया तो कभी उसने खुद को ही नुकसान पहुंचाने की कोशिश की कभी घर से भागने का प्रयास तो कभी जानलेवा घटनाओं का कोशिश।

मासूम दीपक के पिता टूटी झोपड़ी में रहकर जीवनयापन करते है पर बीपीएल कार्ड होने के बावजूद शायद सरकारी मदद उनके झोपड़े में आने के पहले ही दम तोड़ देती है वोट मांगकर चुनाव जीतने वाले स्थानिया विधायक से लेकर प्रशासनिक अफसर तक गुहार लगाने के बाद भी पिता को जब बेटे के इलाज के लिए कोई मदद नही मिली तो उसे कैद करना ही उनकी मजबूरी बन गई। पिता कहते है डॉक्टरों को दिखाने पर बेटे को मानसिक विक्षित बताया गया है हम खुद किसी तरह जीवन यापन कर रहे है उसके इलाज के लिए बहुत पैसा चाहिए है हर जगह से निराश हो चुके है न कभी विधायक आते है न सांसद कभी कोई सरकारी मदद भी नही मिलती बेटे को खुला रखो तो वो पत्थर मरता है कभी नदी में कूद जाता है कभी कुछ भी खा लेता है हम भी मजबूर है।

वहीं मां कहती है क्या करें हम खुद मजबूर है हमारे पास खाने को भी कुछ नही तो इलाज के लिए कहा से पैसा लाये सरपंच ने कार्ड बनवा दिया तो अब राशन भर मिलता है पर इलाज के लिए कोई मदद नही मिलती।

स्थानीय स्तर पर तो सरपंच अपनी सीमा तक मदद कर ही रहे है पर उसे महंगे इलाज की जरूरत है जो विधायक स्वेक्षा अनुदान या फिर दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत ही हो सकता है पर न प्रशासन उनकी कोई सुध लेता है न जनप्रतिनिधि ।