शिवसेना (उबाठा) की दिल्ली में अहम बैठक पार्टी के बागी सांसदों का भविष्य तय करेगी

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शिवसेना (उबाठा) की दिल्ली में अहम बैठक पार्टी के बागी सांसदों का भविष्य तय करेगी

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  • Publish Date - June 18, 2026 / 10:28 AM IST,
    Updated On - June 18, 2026 / 10:28 AM IST

मुंबई, 18 जून (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के भीतर जारी सियासी खींचतान के बीच बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली में पार्टी के संसदीय दल की अहम बैठक होने जा रही है। एक दिन पहले ही सांसदों को बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल होने का व्हिप जारी किए जाने के बाद यह बैठक बागी सांसदों द्वारा अलग गुट बनाने की कोशिशों की दिशा तय कर सकती है और पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन का महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।

यह कदम तब उठाया गया जब इसको लेकर अटकलें तेज हो गईं कि शिवसेना (उबाठा) के कुछ बागी सांसद लोकसभा में अलग गुट बनाने और बाद में एकनाथ शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना में विलय करने की योजना बना रहे हैं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली शिवसेना (उबाठा) ने बुधवार को व्हिप जारी करके अपने सांसदों को राष्ट्रीय राजधानी में अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाया। माना जा रहा है कि यह कदम महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ बागी नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही का रास्ता तैयार करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

यह बैठक बृहस्पतिवार पूर्वाह्न 11 बजे संसद परिसर स्थित पार्टी कार्यालय में होगी।

लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के नौ सदस्य हैं और अलग गुट बनाने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों की जरूरत होगी।

अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत, उद्धव खेमे के साथ हैं, जबकि बाकी छह सांसद संजय पाटिल, संजय देशमुख, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-आष्टीकर और संजय जाधव अलग खेमे में हैं। अगर बागी गुट का एक भी सांसद इस बैठक में शामिल हो गया तो उस गुट को अलग दल की मान्यता नहीं मिल सकती।

सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अपील की है कि पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी ‘‘बागी’’ गुट को मान्यता न दी जाए।

सूत्रों के मुताबिक ऐसी जानकारी मिली है कि इस बढ़ते संकट के बीच शिवसेना (उबाठा) के बागी नेताओं के एक गुट ने बुधवार को अनौपचारिक रूप से लोकसभा अध्यक्ष बिरला से मुलाकात करके लोकसभा में पार्टी के नौ में से छह सांसदों का समर्थन होने का दावा किया।

दिल्ली में बृहस्पतिवार को होने वाली यह अहम बैठक कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से तय करेगी कि उद्धव ठाकरे अपनी संसदीय ताकत बरकरार रख पाते हैं या उन्हें पार्टी में एक और बड़े विभाजन का सामना करना पड़ता है। यदि ऐसा होता है तो 2006 में राज ठाकरे के शिवसेना से अलग होने के बाद यह पार्टी में तीसरा बड़ा विभाजन होगा।

भाषा

खारी अमित

अमित