भोपाल। शुक्रवार को मध्य प्रदेश कांग्रेस के चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सियासी मुहिम की शुरुआत महाकाल दर्शन से की। इससे पहले नए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने भी गुफा मंदिर, महाकाल दर्शन और पीतांबरा पीठ से आशीर्वाद लेने के बाद ही काम शुरू किया था। यही नहीं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी अराजनीतिक यात्रा के बाद अपनी नई राजनीतिक यात्रा का आगाज ओरछा में राम राजा मंदिर से दर्शन करने के बाद करने वाले हैं। इसके मायने ये कि मध्यप्रदेश में इस साल होने वाले चुनाव के दौरान हिंदुत्व का एजेंडा केंद्र में रह सकता है। दिलचस्प ये कि इस बार दोनों ही पक्ष हिंदुत्व के पैरोकार बनकर आमने-सामने होंगे। बीजेपी जहां हमेशा की तरह अपने हार्ड हिंदुत्व वाली लाइन पर चलेगी, तो वहीं कांग्रेस ने ये इशारा करना शुरू किया है कि इस बार वो सॉफ्ट हिंदुत्व पर दांव लगाने जा रही है।
सेक्युलर कांग्रेस की भगवत भक्ति इन दिनों उफ़ान पर है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तो मंदिरों-देवालयों की चौखट को चूम ही रहे हैं। अब मध्यप्रदेश के कांग्रेस नेताओं ने खुद को भक्ति रस में डुबोना शुरू कर दिया है। त्रिपुंड लगाए कांग्रेसी नेताओं का दिखना अब आम हो गया है। आस्था के प्रतीक और प्रतीकों की पॉलिटिक्स, अब तक बीजेपी की इसमें मास्टरी रही है पर अब इस हुनर को कांग्रेस भी तन-मन से आजमाती दिख रही है।
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शुक्रवार को सिंधिया ने इस नई सियासत की एक और मिसाल पेश की। चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष बनने के बाद उनका पहला अभियान है परिवर्तन यात्रा, जिसका आगाज उन्होंने महाकाल दर्शन के साथ किया। इससे पहले मप्र कांग्रेस के अध्यक्ष बनते ही कमलनाथ ने सबसे पहला काम देवालयों के दर्शन करने का किया। वे महाकाल मंदिर गए, पीतांबरा पीठ की यात्रा की। उसके बाद पदभार संभाला। ये दोनों ही घटनाएं केवल संयोग हैं, ये मानना शायद ही सही हो।
कांग्रेस के दो टॉप लीडर जब अपनी हिंदू पहचान को इस तरह मुखरता से ज़ाहिर करते हैं तो ये साफ दिखता है कि मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए जो ज़मीन तैयार हो रही है, उसमें कांग्रेसी पक्ष की ओर से सॉफ्ट हिंदुत्व का एंगल भी ज़रूर होगा। मतलब ये कि आने वाले दिनों में बेशक उनका ध्वज का रंग भगवा नहीं होने वाला पर कांग्रेसी आस्था के तमाम रंगों में बार-बार दिखाई देंगे।
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अब तक सेक्युलर कांग्रेस के सबसे बड़े ध्वजावाहक रहे दिग्विजय सिंह भी बीते कुछ महीनों से आस्थावान हिंदू के तौर पर नज़र आ रहे हैं। ख़ासकर अपनी अराजनीतिक नर्मदा यात्रा के बाद से ऐसी जानकारी निकलकर आ रही है कि दिग्गी राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत भी देव दर्शन के साथ करने जा रहे हैं। सूत्रों पर भरोसा करें तो वो ओरछा के राम राजा मंदिर की यात्रा के बाद मुख्यधारा की राजनीति में फिर सक्रिय होंगे। कांग्रेस मीडिया प्रभारी माणक अग्रवाल के मुताबिक दिग्विजय सिंह की इस धार्मिक यात्रा की तारीख का एलान कर्नाटक में नतीजे आने के बाद होगा ।
कांग्रेस के इस बदले हुए पैंतरे ने बीजेपी की पेशानी पर बल ला दिया है, हालांकि बीजेपी के नेता ये दावा करते हैं कि कांग्रेस की हिंदुवादी लाइन से उनके जनाधार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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एंटोनी कमेटी की रिपोर्ट में ये सिफारिश थी कि कांग्रेस को अपनी एंटी हिंदू वाली छवि बदलनी चाहिए। गुजरात चुनाव में पार्टी ने इस सिफारिश को अमल में लाना शुरू किया। कर्नाटक में भी राहुल गांधी मंदिर, देवालयों और मठों तक पहुंचे। अब मध्यप्रदेश के महासमर में भी इसी फार्मूले को आजमाने की कोशिश हो रही है। कहा जा रहा है कि यहां विधानसभा चुनावों की कैंपेनिंग की शुरुआत पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी महाकाल दर्शन के साथ कर सकते हैं। लब्बोलुआब ये कि कांग्रेस ने देश की सियासत में एक नई लड़ाई शुरू कर दी है, उग्र हिंदू वर्सेस सौम्य हिंदू, और लगे हाथ उसने खुद को सॉफ्ट हिंदुत्व के उत्तराधिकारी के तौर पर भी पेश कर दिया है।
वेब डेस्क, IBC24