कब पूरा होगा इन लोगों का सपना, बजट बढ़ता गया, लेकिन काम में नहीं आई तेजी, 12 साल में 20 फीसदी काम भी नहीं हुआ पूरा
कब पूरा होगा इन लोगों का सपना, बजट बढ़ता गया, लेकिन काम में नहीं आई तेजी, 12 साल में 20 फीसदी काम भी नहीं हुआ पूरा
इंदौर। इंदौर-दाहोद और छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना का काम 12 साल में 20 फीसदी भी पूरा नहीं हो सका है। इन रेल परियोजना की घोषणा होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही रेल लाइन का सपना पूरा होगा। इन परियोजना की लागत भी लगातार समय के साथ बढ़ती जा रही है। काम इतना धीमी गति से चल रहा है कि 11 साल बाद यानी 2030 में भी काम पूरा होने में मुश्किलें आ सकती है।
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रेलवे अधिकारी जल्द जमीन तलाश कर काम को रफ्तार देने के दावा करते दिख रहे हैं। दरअसल इंदौर-दाहोद परियोजना में महज 35 किलोमीटर इंदौर से टीहि तक का ही काम हुआ है। वही छोटा उदयपुर से अलीराजपुर के बीच 50 किलोमीटर पर पटरी बिछाने का काम चल रहा है। दो रेल परियोजना इंदौर से दाहोद और छोटा उदयपुर से धार के लिए 2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भूमि पूजन किया था। इन दोनों परियोजना को 6 साल में पूरा करना था, लेकिन 12 साल बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हो सका है।
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शुरुआत में इंदौर से दाहोद के लिए 678 करोड़ और छोटा उदयपुर से धार के लिए 608 करोड़ रुपए खर्च होना बताया गया था, लेकिन अब इसकी लागत 1765 करोड़ रुपए पहुंच गया है। रेलवे को इंदौर से दाहोद 205 किलोमीटर और छोटा उदयपुर से धार तक 157 किमी की लाइन बिछाने है। इंदौर से टीही तक तो काम पूरा हो गया, और यहां तक कि ट्रेन भी चलने लगी। वहीं दूसरी ओर छोटा उदयपुर से अलीराजपुर की तरफ काम चालू है, लेकिन 50 किलोमीटर के इस काम को कराने में रेलवे ने 12 साल से अधिक का समय लगा दिया है। हालांकि पिछले दिनों आये बजट में इंदौर दाहोद रेल परियोजना के लिए 100 करोड़ रूपए मंजूर हुए है। 2007-08 से लेकर अब तक इंदौर-दाहोद के लिए 606 करोड़ ही मिले है,जिसमें से 420 करोड़ खर्च हो चुके हैं।
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रेलवे द्वारा धीमी गति से काम करने के चलते काम प्रभावित हो रहा है। और राशि भी समय के साथ बढ़ती जा रही है। फिलहाल रेलवे अधिकारी के मुताबिक रेल लाइन का काम लगातार जारी है। फंड की कोई विशेष कमी रेलवे के पास नहीं है, लेकिन रेलवे को सबसे ज्यादा परेशानी भूमि अधिग्रहण करने में आती है। गौरतलब है कि 12 सालों पहले से रेलवे ने काम शुरू किया, लेकिन समय के साथ न ही काम में तेजी आई, लेकिन बजट लगतार बढ़ता गया है।
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