(Indian Stock Market Crash/ Image Credit: IBC24 News)
मुंबई: Indian Stock Market Crash अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाटो और ग्रीनलैंड से जुड़ी धमकियों ने भारतीय शेयर बाजार (Stock Market Crash) और रुपया दोनों पर भारी दबाव डाल दिया है। सेंसेक्स में करीब 2,500 अंक की गिरावट और निफ्टी में 775 अंक की कमी के साथ निवेशकों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा। रुपये ने भी ऐतिहासिक निचले स्तर को छुआ।
बीते तीन दिनों से शेयर बाजार लगातार गिर रहा (Stock Market Crash) है। मंगलवार को सेंसेक्स में 1,000 अंकों की गिरावट आई थी। बुधवार को भी बाजार लाल निशान में खुला और सुबह 10.30 बजे सेंसेक्स 740 अंक और निफ्टी 220 अंक नीचे आ गया। लगातार गिरावट से निवेशकों में चिंता का माहौल है।
16 जनवरी को सेंसेक्स 83,570.35 अंक पर था, जो अब 81,380.12 अंक पर आ गया। यानी करीब 2,445.9 अंकों की गिरावट हुई। निफ्टी 25,694.35 अंक से 24,919.8 अंक पर आकर 774.55 अंक फिसल गया। निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है और बाजार में बेचैनी बढ़ी है।
ग्रीनलैंड पर ट्रंप का कब्जा और यूरोप के खिलाफ टैरिफ की चेतावनी से वैश्विक बाजार में डर और अनिश्चितता बढ़ी। अमेरिका से विदेशी निवेशकों का पैसा निकलना शुरू हो गया। इसके अलावा निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़े, जिससे सोने और चांदी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं।
भारतीय कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। रिलायंस, ICICI बैंक जैसे बड़े शेयरों के खराब नतीजे निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर रहे हैं। आईटी सेक्टर में भी गिरावट देखी गई। कई कंपनियों के शेयरों में अनुमानित लाभ के बावजूद गिरावट आई।
रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले 91.2950 पर आ गया। यह अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। विदेशी पूंजी की निकासी और वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव बना। इससे आयात महंगा होगा और निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली से बाजार पर दबाव बढ़ा। 20 जनवरी को उन्होंने 2,938 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू निवेशक (DIIs) ने 3,666 करोड़ रुपये के शेयर खरीद कर थोड़ी राहत दी, लेकिन विदेशी बिकवाली अब भी बाजार की दिशा तय कर रही है।
तीन दिनों की गिरावट (Stock Market Crash) में निवेशकों को लगभग 17.82 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बीएसई का मार्केट कैप 4,67,84,606.92 करोड़ रुपये से गिरकर 449.76 लाख करोड़ रुपये हो गया। बाजार लगातार विदेशी फंड की निकासी, कमजोर घरेलू कमाई और वैश्विक तनाव से जूझ रहा है।
निवेशक अब ज्यादा सतर्क हो गए हैं। वे शेयरों का चुनाव सोच-समझकर कर रहे हैं। ट्रंप की धमकियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की तलाश है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
नोट:- शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।