NSE IPO News: 10 साल बाद खुल सकता है मुनाफे का दरवाजा, NSE IPO को लेकर बड़ा अपडेट, अगले हफ्ते SEBI में अर्जी, अब निवेशकों की जेबें होंगी भारी?

Ads

NSE IPO News: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा आईपीओ अगले सप्ताह सेबी के पास शुरुआती दस्तावेज दाखिल कर सकता है। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा। जिसमें LIC और SBI अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। को-लोकेशन विवाद के निपटारे से प्रक्रिया आगे बढ़ी है।

  •  
  • Publish Date - June 14, 2026 / 04:28 PM IST,
    Updated On - June 14, 2026 / 04:28 PM IST

(NSE IPO News/ Image Credit: Meta AI)

HIGHLIGHTS
  • NSE IPO अगले सप्ताह SEBI में दस्तावेज दाखिल कर सकता है।
  • यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) मॉडल पर आधारित होगा।
  • LIC और SBI जैसे बड़े निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।

नई दिल्ली: NSE IPO News: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ अब एक बड़े कदम के करीब पहुंच सकता है। जानकारी के मुताबिक NSE अगले सप्ताह यानी 15 या 16 जून को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास शुरुआती दस्तावेज दाखिल कर सकता है। इस कदम के साथ करीब एक दशक में चल आ रहा इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है।

बोर्ड की मंजूरी और ऑफर फॉर सेल मॉडल

NSE के निदेशक मंडल ने 6 फरवरी को इस आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यह मंजूरी SEBI से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिलने के बाद दी गई थी। यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा यानी इसमें कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा। मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाजार में शेयर उपलब्ध कराएंगे।

बड़े शेयरधारकों की हिस्सेदारी

NSE में कई बड़े संस्थागत और विदेशी निवेशक शामिल हैं। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) लगभग 10.72% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा शेयरधारक है। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी सहयोगी इकाई SBI कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5% है। विदेशी निवेशकों में Temasek की Aranda Investments और Canada Pension Plan Investment Board (CPPIB) भी शामिल हैं।

लंबा इंतजार और को-लोकेशन विवाद

NSE की लिस्टिंग योजना लगभग 10 साल से रुकी हुई थी। इसका मुख्य कारण को-लोकेशन विवाद और नियामकीय जांचें थीं। 2016 में NSE ने पहली बार आईपीओ के लिए दस्तावेज दाखिल किए थे। लेकिन SEBI ने कुछ तकनीकी और संचालन संबंधी चिंताओं के कारण इसे मंजूरी नहीं दी थी।

को-लोकेशन केस का निपटारा

को-लोकेशन मामले में कुछ ब्रोकरों को ट्रेडिंग सिस्टम तक अनुचित पहुंच मिलने के आरोप लगे थे। इस मामले के समाधान के लिए NSE ने 2025 में सेबी के पास निपटान आवेदन दायर किया और लगभग 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान करने की पेशकश की। इसके बाद सूचीबद्धता की प्रक्रिया आगे बढ़ी और रास्ता साफ हुआ।

बड़े आईपीओ की उम्मीद

विशेषज्ञों के अनुसार, NSE का यह आईपीओ भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है। कंपनी का मूल्यांकन अनलिस्टेड बाजार में 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। दस्तावेज दाखिल होने के बाद आईपीओ के आकार और समयसीमा को लेकर और स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। कंपनी ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए करीब 20 मर्चेंट बैंकर और कई सलाहकारों को भी नियुक्त किया है।

नोट:-शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:

NSE IPO कब दाखिल हो सकता है?

NSE अगले सप्ताह यानी 15 या 16 जून को SEBI के पास दस्तावेज दाखिल कर सकता है।

क्या NSE IPO में नए शेयर जारी होंगे?

नहीं, यह पूरी तरह OFS (Offer for Sale) होगा, जिसमें नए शेयर जारी नहीं होंगे।

NSE में सबसे बड़ा शेयरधारक कौन है?

LIC लगभग 10.72% हिस्सेदारी के साथ NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है।

NSE IPO में देरी क्यों हुई थी?

को-लोकेशन विवाद और नियामकीय कारणों की वजह से IPO प्रक्रिया लगभग 10 साल तक रुकी रही।