(NSE launch Brent Crude Futures/ Image Credit: IBC24 News)
नई दिल्ली: NSE launch Brent Crude Futures: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेक्शन में एक नया कदम उठाते हुए ब्रेंट क्रूड (प्लैट्स) फ्यूचर्स लॉन्च करने की घोषणा की है। इसके लिए NSE ने S&P ग्लोबल एनर्जी (प्लैट्स) के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इस नई पेशकश की ट्रेडिंग 13 अप्रैल 2026 से शुरू होगी। इस योजना को मार्केट रेगुलेटरी सेबी की मंजूरी मिली है और इससे भारतीय रिफाइनरियों और ट्रेडर्स अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के ब्रेंट क्रूड के भाव के साथ-साथ सीधे हेजिंग कर सकेंगे।
भारत में अब तक क्रूड ऑयल की ट्रेडिंग ज्यादातर MCX पर होती थी, जो मुख्य रूप से अमेरिकी तेल (WTI) के भाव पर आधारित होती थी। लेकिन ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स के आने से निवेशकों को वैश्विक मानक पर ट्रेडिंग करने का मौका मिलेगा। दुनिया में लगभग 60-70 प्रतिशत कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के भाव पर खरीदा और बेचा जाता है। इसका मतलब यह है कि अब भारतीय ट्रेडर्स NSE पर सीधे इस ग्लोबल रेट के अनुसार ट्रेड कर सकते हैं। इससे NSE के एनर्जी सेक्शन में बड़ा विस्तार होगा और ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ने की उम्मीद है।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स ‘BRCRUDEOIL’ के सिंबल के साथ उपलब्ध होंगे। यह S&P ग्लोबल एनर्जी (प्लैट्स) के डेटेड ब्रेंट असेसमेंट पर आधारित होगा, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल कीमतों का प्रमुख मानक माना जाता है। इस कॉन्ट्रैक्ट में कम से कम 100 बैरल तेल का सौदा करना होगा। यह कैश सेटलमेंट वाला होगा, यानी एक्सपायरी के दिन मुनाफा या नुकसान सीधे रुपये में तय हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों के बावजूद इसे अब रुपये में ट्रेड किया जा सकेगा।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लॉन्च होने से भारतीय सरकारी और प्राइवेट तेल कंपनियां अब अपने तेल के दाम हेजिंग कर सकेंगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से उन्हें नुकसान कम होगा। साथ ही छोटे निवेशकों को MCX के अलावा ग्लोबल तेल की बढ़ती-घटती कीमतों पर मुनाफा कमाने का एक नया प्लेटफॉर्म मिलेगा। कुल मिलाकर यह कदम NSE के एनर्जी सेक्शन को मजबूत, ट्रेडिंग को ज्यादा पारदर्शी और निवेशकों के लिए संभावनाओं से भरपूर बनाने वाला है।
नोट:- शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।