Dixon-Vivo Joint Venture: भारत में फिर गूंजेगा Vivo का नाम! Dixon के साथ ज्वाइंट वेंचर को मिली मंजूरी, क्या अब सस्ते हो जाएंगे मोबाइल?

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Dixon-Vivo Joint Venture: भारतीय कंपनी डिक्सन टेक्नोलॉजी और वीवो के बीच हुआ ज्वाइंट वेंचर को सरकार की मंजूरी मिल गई है। अब दोनों कंपनियां मिलकर भारत में स्मार्टफोन का निर्माण करेंगी। इस साझेदारी से देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा और ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलने की उम्मीद है।

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  • Publish Date - July 10, 2026 / 03:54 PM IST,
    Updated On - July 10, 2026 / 03:56 PM IST

(Dixon-Vivo Joint Venture/ Image Credit: AI-generated)

HIGHLIGHTS
  • Dixon Technologies और Vivo के ज्वाइंट वेंचर को भारत सरकार की मंजूरी मिल गई।
  • नई कंपनी भारत में Vivo के स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाएगी।
  • ज्वाइंट वेंचर में Dixon की 51% और Vivo India की 49% हिस्सेदारी होगी।

नई दिल्ली: Dixon-Vivo Joint Venture: भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी डिक्सन टेक्नोलॉजी और चीनी स्मार्टफोन ब्रांड Vivo के ज्वाइंट वेंचर (Dixon-Vivo Joint Venture) को मंजूरी दे दी है। इस साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां मिलकर भारात में स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्राॉनिक डिवासेस का निर्माण करेंगी। इस ज्वाइंट वेंचर को मंजूरी मिलन का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। दोनों कंपनियों ने दिसंबर 2024 में इस प्रोजेक्ट के लिए बाइंडिंग टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए थे। इस साझेदारी में डिक्सन की 51% और वीवो इंडिया की 49% हिस्सेदारी होगी। प्रोजेक्ट पर इसी साल दिसंबर तक काम शुरू होने की उम्मीद है।

भारत में Vivo के फोन बनाएगी नई कंपनी

इस ज्वाइंट वेंचर के तहत बनने वाली कंपनी भारत में Vivo के स्मार्टफोन बनाएगी। इसके अलावा यह कंपनी दूसरी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए भी मैन्युफैक्चरिंग का काम कर सकती है। Dixon को इस साझेदारी से अपने कारोबार में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है। कंपनी के मुताबिक, इस साझेदारी से हर साल करीब 2 से 2.2 करोड़ नए स्मार्टफोन का उत्पादन जुड़ सकता है। यह Vivo के भारत में होने वाले कुल उत्पादन का बड़ा हिस्सा होगा। फिलहाल Vivo भारत में हर साल करीब 3.5 करोड़ स्मार्टफोन बनाती है। कंपनी की योजना के अनुसार 2027 तक उत्पादन बढ़कर करीब 1.1 करोड़ स्मार्टफोन और 2028 तक पूरी क्षमता तक पहुंच सकता है।

देश की मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

Dixon और Vivo की साझेदारी (Dixon-Vivo Joint Venture) से भारत में मोबाइल निर्माण को मजबूती मिलने की उम्मीद है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से स्मार्टफोन सप्लाई चेन का विस्तार होगा और नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की जरूरत बढ़ेगी। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। सरकार लगातार देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है और मोबाइल कंपोनेंट पर शुल्क में बदलाव जैसे फैसले भी इसी दिशा में उठाए गए हैं।

ग्राहकों को मिल सकते हैं ये फायदे

इस ज्वाइंट वेंचर का फायदा (Dixon-Vivo Joint Venture) स्मार्टफोन यूजर्स को भी मिल सकता है। भारत में उत्पादन बढ़ने से फोन की उपलब्धता बेहतर हो सकती है और नए मॉडल जल्दी बाजार में आ सकते हैं। वहीं, घरेलू निर्माण बढ़ने और लागत कम होने से भविष्य में स्मार्टफोन की कीमतों में कमी आने की संभावना भी जताई जा रही है।

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Dixon और Vivo के ज्वाइंट वेंचर को मंजूरी किसने दी है?

भारत सरकार ने Dixon Technologies और Vivo के ज्वाइंट वेंचर को मंजूरी दी है।

Dixon-Vivo ज्वाइंट वेंचर में किसकी कितनी हिस्सेदारी होगी?

इस साझेदारी में Dixon Technologies की 51% और Vivo India की 49% हिस्सेदारी होगी।

इस ज्वाइंट वेंचर में क्या बनाया जाएगा?

नई कंपनी भारत में Vivo के स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस का निर्माण करेगी।

इस डील से भारत को क्या फायदा होगा?

इससे देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी, सप्लाई चेन मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।