(Dixon-Vivo Joint Venture/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: Dixon-Vivo Joint Venture: भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी डिक्सन टेक्नोलॉजी और चीनी स्मार्टफोन ब्रांड Vivo के ज्वाइंट वेंचर (Dixon-Vivo Joint Venture) को मंजूरी दे दी है। इस साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां मिलकर भारात में स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्राॉनिक डिवासेस का निर्माण करेंगी। इस ज्वाइंट वेंचर को मंजूरी मिलन का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। दोनों कंपनियों ने दिसंबर 2024 में इस प्रोजेक्ट के लिए बाइंडिंग टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए थे। इस साझेदारी में डिक्सन की 51% और वीवो इंडिया की 49% हिस्सेदारी होगी। प्रोजेक्ट पर इसी साल दिसंबर तक काम शुरू होने की उम्मीद है।
इस ज्वाइंट वेंचर के तहत बनने वाली कंपनी भारत में Vivo के स्मार्टफोन बनाएगी। इसके अलावा यह कंपनी दूसरी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए भी मैन्युफैक्चरिंग का काम कर सकती है। Dixon को इस साझेदारी से अपने कारोबार में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है। कंपनी के मुताबिक, इस साझेदारी से हर साल करीब 2 से 2.2 करोड़ नए स्मार्टफोन का उत्पादन जुड़ सकता है। यह Vivo के भारत में होने वाले कुल उत्पादन का बड़ा हिस्सा होगा। फिलहाल Vivo भारत में हर साल करीब 3.5 करोड़ स्मार्टफोन बनाती है। कंपनी की योजना के अनुसार 2027 तक उत्पादन बढ़कर करीब 1.1 करोड़ स्मार्टफोन और 2028 तक पूरी क्षमता तक पहुंच सकता है।
Dixon और Vivo की साझेदारी (Dixon-Vivo Joint Venture) से भारत में मोबाइल निर्माण को मजबूती मिलने की उम्मीद है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से स्मार्टफोन सप्लाई चेन का विस्तार होगा और नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की जरूरत बढ़ेगी। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। सरकार लगातार देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है और मोबाइल कंपोनेंट पर शुल्क में बदलाव जैसे फैसले भी इसी दिशा में उठाए गए हैं।
इस ज्वाइंट वेंचर का फायदा (Dixon-Vivo Joint Venture) स्मार्टफोन यूजर्स को भी मिल सकता है। भारत में उत्पादन बढ़ने से फोन की उपलब्धता बेहतर हो सकती है और नए मॉडल जल्दी बाजार में आ सकते हैं। वहीं, घरेलू निर्माण बढ़ने और लागत कम होने से भविष्य में स्मार्टफोन की कीमतों में कमी आने की संभावना भी जताई जा रही है।