दबाव के बावजूद अशोक सिद्धार्थ ने तुरंत अपने संन्यास लेने की घोषणा नहीं की : मायावती

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दबाव के बावजूद अशोक सिद्धार्थ ने तुरंत अपने संन्यास लेने की घोषणा नहीं की : मायावती

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  • Publish Date - September 11, 2026 / 01:08 PM IST,
    Updated On - September 11, 2026 / 01:08 PM IST

लखनऊ, 11 सितंबर (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शुक्रवार को दावा किया कि पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ पर काफी दबाव होने के बावजूद उन्होंने तत्काल राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा नहीं की।

बसपा प्रमुख ने शुक्रवार को ‘एक्स’ खाते पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यहां यह भी बताना बहुत जरूरी है कि जिस दिन बसपा ने अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी, उस दिन उन पर काफी दबाव पड़ने के बावजूद उन्होंने तत्काल संन्यास की घोषणा नहीं की थी।’’

मायावती ने कहा, ‘‘क्योंकि उस दिन ये पूरी रात इसे रुकवाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे इस्तेमाल करते रहे। इसमें कामयाबी नहीं मिलने पर मजबूरी में अगले दिन, यह सोचकर लगभग सुबह साढ़े छह बजे उन्हें अपने संन्यास की काफी किंतु-परंतु वाली घोषणा करनी पड़ी।’’

उन्होंने इसी पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि सिद्धार्थ को अंदाजा था कि ज्यादा देरी होने पर कहीं और बड़ा नुकसान न हो जाए। बसपा प्रमुख ने कहा कि सही समय आने पर इस बारे में पार्टी के लोगों को और भी बहुत कुछ बताया जाएगा।

एक दिन पहले बृहस्पतिवार को राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक और सामाजिक जीवन से ‘संन्यास’ लेने के ऐलान के बाद मायावती ने अपने भतीजे एवं सिद्धार्थ के दामाद आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह ‘मुक्त’ कर दिया था।

सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि वह अभी इसी वक्त राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहे हैं और संन्यास तो बहुत छोटी चीज है अगर उन्हें कभी मायावती के लिए अपनी जान भी देनी पड़े तो वह उनके लिए फख्र की बात होगी।

मायावती ने पोस्ट में कहा कि अन्य दलों की तरह बसपा में भी जो लोग अनुशासनहीनता के कारण समय-समय पर निष्कासित कर दिए जाते हैं, उनमें से अधिकतर कई दल बदल चुके हैं, जो किसी से छिपा नहीं है।

उन्होंने कहा कि इसी से अंदाजा लगा लेना चाहिए कि ये लोग पूरे ‘‘स्वार्थी और अवसरवादी’’ हैं और वे किसी भी पार्टी के हित में नहीं हो सकते हैं।

बसपा प्रमुख ने कहा, ‘‘जिन लोगों को पार्टी से निकाल दिया जाता है, उनमें से कुछ लोग दूसरे दलों के हाथों में खेलकर छोटी-छोटी पार्टी और संगठन आदि भी बना लेते हैं, जिनसे ‘बहुजन समाज’ का सामूहिक हित नहीं हो सकता है। हालांकि, ऐसी पार्टियां बिना किसी गठबंधन के चुनाव भी नहीं लड़ सकती हैं।’’

उन्होंने छोटे दल बनाने वाले बसपा से निष्कासित लोगों की ओर इशारा करते हुए कहा कि किसी भी पार्टी की सरकार बनने पर सरकार में शामिल हुए बिना भी ये लोग नहीं रह सकते हैं।

मायावती ने कहा कि जो ऐसे लोगों को अक्सर अपनी पार्टी में लेने की बात करते हैं या उन्हें पार्टी बनाने की सलाह देती हैं, उन्हें पहले अपनी तरफ जरूर देख लेना चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस की तुलना ‘‘डूबते जहाज’’ से करते हुए कहा, ‘‘कांग्रेस जिन निकाले गए लोगों को अपनी पार्टी में लेने की बात कर रही है, तो ऐसी पार्टी में भला कौन शामिल होकर अपने भविष्य को अंधकार में डालेगा? खासकर तब, जब इस पार्टी से दूरी बनाने के लिए बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपने जीवनकाल में बहुजन समाज के लोगों को आगाह भी किया था।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इसलिए वर्तमान हालात में पार्टी और आंदोलन के हित में बसपा के लोगों के लिए यह सब जानना और समझना भी बहुत जरूरी है।

सिद्धार्थ द्वारा बृहस्पतिवार को ‘‘देरी के लिये क्षमा प्रार्थी’’ नोट के साथ की गई इस पोस्ट के कुछ ही देर बाद मायावती ने भी ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था कि अगर सिद्धार्थ को अपने दामाद आकाश आनन्द के उज्ज्वल भविष्य के साथ ही बसपा तथा बहुजन आंदोलन की जरा सी भी चिंता होती तो वह बिना देर किए बुधवार को ही राजनीति से संन्यास की घोषणा कर देते लेकिन ऐसा नहीं होना यह साबित करता है कि सिद्धार्थ की नीयत में खोट है और उनकी महत्वाकांक्षा कम नहीं हुई है।

दरअसल मायावती ने बुधवार को ‘एक्स’ पर एक संदेश में सिद्धार्थ पर लगातार अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा था कि अगर वह राजनीति से संन्यास ले लें तभी उनके दामाद आकाश आनंद को पार्टी में दोबारा जिम्मेदारियां देने पर विचार किया जा सकता है।

भाषा आनंद मनीष

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