Reported By: Nasir Gouri
,E Rickshaw Number Limit: ई-रिक्शा के चालकों के लिए आई बुरी खबर, अब शहर में तय होगी ई-रिक्शा की संख्या, हाईकोर्ट ने इस वजह से लिया फैसला, राज्य सरकार को दिए ये निर्देश /image: Social Media
ग्वालियर। MP E Rickshaw Number Limit: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने ई-रिक्शा को राष्ट्रीय समस्या बताते हुए केंद्र सरकार को 60 दिन में नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। वहीं मध्यप्रदेश सरकार को भी ई-रिक्शा के संचालन और संख्या को लेकर 12 सप्ताह में ठोस नियम बनाने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद ग्वालियर में ई-रिक्शा को लेकर बहस तेज हो गई है।
ग्वालियर की सड़कों पर करीब 14 हजार ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या को लेकर हाईकोर्ट ने भी चिंता जताई है। कोर्ट ने परमिट (E Rickshaw Permit Rules), ई-रिक्शा की संख्या और संचालन व्यवस्था तय करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन कोर्ट के आदेश के बीच ई-रिक्शा को लेकर आम आदमी और चालकों की राय बिल्कुल अलग है।
Madhya Pradesh E Rickshaw Rules आम लोगों का कहना है कि ई-रिक्शा शहर के ट्रैफिक (Gwalior Traffic News) के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गए हैं। सड़क पर जहां-तहां रुकना… सवारी बैठाना… और एक साथ कई ई-रिक्शा का सड़क घेर लेना… जाम की बड़ी वजह बन रहा है। ई-रिक्शा के कारण परेशान हैं। पूरा ट्रैफिक जाम करके रख दिया है। यही सबसे बड़ी ट्रैफिक की समस्या है। लेकिन ई-रिक्शा चालक इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। चालकों का दावा है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए ई-रिक्शा चला रहे हैं और लोगों को सस्ता परिवहन उपलब्ध करा रहे हैं।
MP E Rickshaw Number Limit यानी हाईकोर्ट के आदेश के बाद सवाल सिर्फ ई-रिक्शा की संख्या का नहीं… बल्कि उनके संचालन और ट्रैफिक व्यवस्था का भी है। एक तरफ आम आदमी जाम के लिए ई-रिक्शा को जिम्मेदार बता रहा है… तो दूसरी तरफ चालक नियमों के मुताबिक संचालन का दावा कर रहे हैं। बहरहाल अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार को नीति बनानी है। ऐसे में देखना होगा कि नई व्यवस्था ई-रिक्शा चालकों के हितों का ध्यान रखती है या शहर के ट्रैफिक को राहत देने के लिए सख्ती बढ़ाती है।
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