अमेरिकी प्रस्ताव पारित, बूचा नरसंहार पर UNHRC से रूस सस्पेंड, भारत समेत 58 देशों ने वोटिंग से बनाई दूरी

अमेरिकी प्रस्ताव पारित, बूचा नरसंहार पर UNHRC से रूस सस्पेंड, भारत समेत 58 देशों ने वोटिंग से बनाई दूरी

रूस को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से बेदखल करने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पास हो गया है। वहीं भारत ने इस बार भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

Edited By: , November 29, 2022 / 07:58 PM IST

नई दिल्ली। रूस को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से बेदखल करने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पास हो गया है। वहीं भारत ने इस बार भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। रूस के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव के समर्थन में 93 देशों ने वोट किया, जबकि 24 देशों ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। वोटिंग में 58 देशों ने हिस्सा नहीं लिया।

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यूक्रेन की राजधानी कीव के उपनगर बूचा से सामने आई नागरिकों के शवों की भयावह तस्वीरों और वीडियो के बाद अमेरिका की राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने रूस को मानवाधिकार परिषद से हटाने के लिए UNGA में विशेष बैठक बुलाई थी।

रूस का दावा- बूचा में जनसंहार की तस्वीरें गलत

रूस का कहना है कि बूचा की जो भी तस्वीरें और वीडियो दिखाए जा रहे हैं वो मैनेज्ड हैं। रूस ने जब बूचा शहर को छोड़ा था तब सब ठीक था लेकिन अचानक पश्चिम के दबाव में रूस को बदनाम करने के लिए अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं। मालूम हो कि यूक्रेन रूसी सेना द्वारा बूचा में 400 से ज्यादा लोगों के बेरहमी से मारे जाने का दावा कर रहा है।

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UNHRC से बेदखली को लेकर हुई वोटिंग के बाद क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि रूस अपने हितों की रक्षा करेगा। मालूम हो कि रूस के खिलाफ यह प्रस्ताव अमेरिका ने रखा है। मालूम हो कि यूक्रेन की राजधानी कीव के उपनगर बूचा से सामने आई नागरिकों के शवों की भयावह तस्वीरों और वीडियो के बाद अमेरिका की राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने रूस को मानवाधिकार परिषद से हटाने के लिए UNGA में विशेष बैठक बुलाई थी।

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UNGA में वोटिंग शुरू से पहले भारत स्थित रूसी दूतावास ने बयान जारी कर बूचा हमले की निंदा की थी। दूतावास ने कहा, ‘बूचा में जघन्य हमला द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नाजी अपराधों के दु:स्‍वप्‍न की याद दिलाता है। रूस, भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया ने इसे घृणित करार देते हुए इसकी निंदा की है। रूस इस घृणित युद्ध अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए मुख्य चुनौती स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।’

2006 में स्थापित की गई संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की सदस्यता गंवाने वाला रूस दूसरा देश होगा। इससे पहले 2011 में लीबिया को सभा ने परिषद से निलंबित कर दिया था। यह फैसला उस समय लिया गया था जब लीबिया में लंबे उथल-पुथल के बाद वहां के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को सत्ता से बेदखल कर मौत के घाट उतार दिया गया था।

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पहले भी वोटिंग से दूर रह चुका है भारत

यूक्रेन पर रूसी हमले के दौरान ही अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, महासभा और मानवाधिकार परिषद में अलग-अलग मौकों पर रूस के खिलाफ अब तक 10 प्रस्तावों को पेश किया जा चुका है। इन सभी प्रस्तावों पर वोटिंग के दौरान भारत ने हिस्सा नहीं लिया था।