आजमगढ़ (उप्र), 18 फरवरी (भाषा) आजमगढ़ की एक अदालत ने 27 साल पहले मुबारकपुर कस्बे में हुई हत्या के एक मामले में 12 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने गत 13 फरवरी को सभी 12 आरोपियों को दोषी करार दिया था और 17 फरवरी को नियत तिथि पर उन्हें यह सजा सुनाई गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार स्थानीय निवासी नासिर हुसैन ने 30 अप्रैल 1999 को मुबारकपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें उसने कहा था कि पुरा ख्वाजा क्षेत्र में रहने वाले उसके चाचा अली अकबर 27 अप्रैल 1999 को लापता हो गये थे और लापता होने के तीसरे दिन 30 अप्रैल 1999 को अली अकबर का सिर कटा शव राजा भाट तालाब में पाया गया था।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शिया-सुन्नी दंगे के दौरान मुहर्रम के जुलूस से लौटते समय सुन्नी समुदाय के लोगों ने अली अकबर पर हमला करके उनकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने इस मामले में हुसैन अहमद, मोहम्मद अयूब फैजी, हाजी मोहम्मद सुलेमान, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब, अली जहीर, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक, मोहम्मद असद, हाजी अब्दुल खालिक, अफजल, अलाउद्दीन, दिलशाद और वसीम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
मामले के लंबित रहने के दौरान चार आरोपियों हाजी मोहम्मद सुलेमान, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक और हाजी अब्दुल खालिक की मौत हो गई थी।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने मंगलवार को हुसैन अहमद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब, अली जहीर, इरशाद, मोहम्मद असद, अफजल, अलाउद्दीन, दिलशाद और वसीम को अली अकबर की हत्या का दोषी ठहराया।
अदालत में सभी को उम्र कैद और 66500-66500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
भाषा सं. सलीम शोभना
शोभना