संभल हिंसा मामले में अफरोज की एनएसए हिरासत रद्द होने पर परिवार ने खुशी जताई

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संभल हिंसा मामले में अफरोज की एनएसए हिरासत रद्द होने पर परिवार ने खुशी जताई

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  • Publish Date - September 30, 2026 / 12:23 PM IST,
    Updated On - September 30, 2026 / 12:23 PM IST

संभल (उप्र), 30 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत मुल्ला अफरोज की हिरासत को उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के बाद उनके भाई ने इस फैसले का स्वागत किया और उत्तर प्रदेश सरकार से संभल हिंसा मामले की निष्पक्ष जांच का आदेश देने की अपील की।

संभल के दीपा सराय निवासी अफरोज के बड़े भाई शाहरोज ने दावा किया कि उनके भाई के खिलाफ कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य या ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं थी। उन्होंने कहा कि लगभग 20 महीने की कैद के बाद परिवार को राहत मिली है।

शाहरोज ने मंगलवार देर रात संवाददाताओं से कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने बहुत अच्छा फैसला दिया है। लंबे समय बाद हमारे दिल खुश हैं और हमें कुछ राहत मिली है।’’

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को रासुका के तहत अफरोज की निवारक हिरासत को रद्द कर दिया और उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। न्यायालय ने कहा कि पुलिस के समक्ष कथित रूप से दिया गया इकबालिया बयान निवारक हिरासत का आधार नहीं बन सकता।

अफरोज को 17 जनवरी, 2025 को 2024 के संभल हिंसा मामले के संबंध में गिरफ्तार किया गया था और 13 अक्टूबर, 2025 को उसके खिलाफ रासुका के तहत हिरासत आदेश पारित किया गया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जून 2026 में अफरोज की हिरासत को बरकरार रखा था।

शाहरोज ने कहा कि अफरोज को घटना से जुड़े सभी छह आपराधिक मामलों में जमानत मिल चुकी थी और उसे एनएसए मामले में भी उच्चतम न्यायालय से राहत मिली है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार, प्रशासन और मुख्यमंत्री से मेरी अपील है कि निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यह स्थापित हो सके कि कौन दोषी है और कौन नहीं।’’

शाहरोज ने बताया कि 24 नवंबर, 2024 को हुई हिंसा के करीब 50-55 दिन बाद अफरोज को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद अफरोज पर कई मामले दर्ज किए गए।

नवंबर 2024 में संभल में तनाव उस समय बढ़ गया था, जब वहां स्थित शाही जामा मस्जिद का अदालत के आदेश पर सर्वेक्षण किया जा रहा था। यह सर्वेक्षण उन दावों के बाद कराया गया था कि इस स्थान पर पहले हरिहर मंदिर मौजूद था।

सर्वेक्षण के दूसरे दौर के दौरान 24 नवंबर को प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों की सुरक्षा कर्मियों से झड़प हो गई थी। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे।

भाषा सं जफर मनीषा शफीक

शफीक