विपक्ष की ताकत विधान परिषद चुनाव से ही स्पष्ट हो जाएगी : चंद्रशेखर आजाद

Ads

विपक्ष की ताकत विधान परिषद चुनाव से ही स्पष्ट हो जाएगी : चंद्रशेखर आजाद

  •  
  • Publish Date - September 29, 2026 / 04:55 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 04:55 PM IST

संभल, 29 सितंबर (भाषा) आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने मंगलवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में विपक्ष की ताकत का अंदाजा राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद चुनाव में ही लग जाएगा।

चंदौसी में एक जनसभा को संबोधित करने से पहले संभल में संवाददाताओं से बातचीत में आजाद ने कहा कि अगर विपक्षी दलों की तैयारी मजबूत है और वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने की स्थिति में हैं, तो विधान परिषद चुनाव में ही तस्वीर साफ हो जाएगी।

आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिशों में जुटी है। उन्होंने कहा, “हम गठबंधन के लिए किसी के घर के आसपास नहीं घूम रहे, हम तो जनता के बीच जा रहे, मेहनत कर रहे, हर किसी की भागीदारी सुनिश्चित कर रहे और सभी को साथ लेकर चलने का प्रयास कर रहे।”

जब आजाद से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती के इस आरोप के बारे में पूछा गया कि वह भाजपा की ‘बी-टीम’ के तौर पर काम कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “आरोप-प्रत्यारोप राजनीति का हिस्सा हैं। मैं चाहता हूं कि बसपा और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) मिलकर काम करें। लेकिन ताली एक हाथ से नहीं बजती।”

आजाद ने मायावती को उनके चुनाव को रद्द कराने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के दम पर नगीना से फिर से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लग रहे आरोपों पर आजाद ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के बजाय निर्वाचन आयोग को इन आरोपों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने मामले की जांच और उच्चतम न्यायालय के दखल की भी मांग की।

उच्चतम न्यायालय के संभल हिंसा के आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत को रद्द करने और उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने पर आजाद ने कहा कि यह रकम बहुत कम है।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाना चाहिए था।”

आजाद ने आरोप लगाया कि सरकार असहमति की आवाज को दबाने के लिए रासुका और आपराधिक मामलों का सहारा ले रही है। उन्होंने दावा किया कि लोग मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं और 2027 में राज्य की सत्ता में बदलाव चाहते हैं।

भाषा

सं आनन्द पारुल

पारुल