डुसू चुनाव नतीजों के बाद उप्र में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग ने पकड़ा जोर
डुसू चुनाव नतीजों के बाद उप्र में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग ने पकड़ा जोर
(जय कृष्ण)
लखनऊ, 19 सितंबर (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डुसू) चुनाव के नतीजे आने के बाद उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव फिर से शुरू करने की मांग जोर पकड़ रही है और समाजवादी पार्टी एवं कांग्रेस के छात्र संगठनों ने राज्य में इन चुनावों पर लगी रोक पर सवाल उठाए हैं।
समाजवादी छात्र सभा और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से सवाल किया कि जब दिल्ली में छात्र संघ चुनाव हो रहे हैं तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं?
समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष विनीत कुशवाहा ने कहा कि भाजपा नेता और मंत्री दिल्ली में छात्र संघ चुनाव जीतने वालों को बधाई तो देते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसे चुनावों को फिर से शुरू करने के सवाल पर चुप रहते हैं।
उन्होंने कहा, ”अगर दिल्ली में चुनाव हो सकते हैं, तो उत्तर प्रदेश में इन्हें क्यों रोका गया है?”
कुशवाहा ने उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे पर एबीवीपी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि संगठन ने पहले राज्य में छात्र संघ चुनाव फिर से शुरू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किये थे।
उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान छात्र संघ चुनाव फिर से शुरू किए गए थे लेकिन 2017 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद उन्हें फिर से रोक दिया गया।
कुशवाहा ने कहा कि छात्र संघ उच्च शिक्षण संस्थानों की शुल्क में बढ़ोत्तरी, हॉस्टल की सुविधाओं और उत्पीड़न जैसे मुद्दों को उठाने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं और छात्र राजनीति मुख्यधारा की सियासत में आने वालों के लिए एक सीढ़ी है।
उन्होंने कहा कि अगर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो वह उत्तर प्रदेश में फिर से छात्र संघ चुनाव करायेगी।
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष आर्यन मिश्रा ने भी छात्रसंघ चुनाव फिर से शुरू करने की मांग की और डुसू चुनाव में संगठन के उम्मीदवार की हार को स्वीकार किया।
मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में छात्र संघ चुनाव से मजदूरों और किसान परिवारों से आने वाले गरीब छात्रों को भी नेता के तौर पर उभरने का मौका मिलेगा।
उन्होंने कहा, ”छात्र राजनीति युवाओं में सवाल पूछने की इच्छा जगाती है। छात्र संघ चुनाव न कराकर छात्र राजनीति को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।”
उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में वर्ष 2007 से छात्रसंघ चुनावों पर लगभग पूरी तरह रोक लगी है। साल 2007 में तत्कालीन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सरकार ने परिसरों में होने वाली हिंसा, तोड़फोड़ और व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देकर छात्रसंघ चुनावों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
भाषा सलीम अमित
अमित

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