अधिवक्ता लिपिकों के कल्याण के लिए नई कमेटी गठित करे प्रदेश सरकार: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

अधिवक्ता लिपिकों के कल्याण के लिए नई कमेटी गठित करे प्रदेश सरकार: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

अधिवक्ता लिपिकों के कल्याण के लिए नई कमेटी गठित करे प्रदेश सरकार: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
Modified Date: August 18, 2026 / 07:17 pm IST
Published Date: August 18, 2026 7:17 pm IST

लखनऊ, 18 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को अधिवक्ताओं के साथ न्यायिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करने वाले अधिवक्ता लिपिकों के कल्याण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को नई समिति गठित करने का निर्देश दिया।

अदालत ने जनवरी 2021 में गठित पुरानी समिति की सिफारिशों को खारिज करते हुए कहा कि समिति के अधिकांश सदस्यों को अधिवक्ता लिपिकों के कामकाज, पारिश्रमिक, दायित्व और न्याय प्रशासन में उनकी भूमिका की संभवतः पर्याप्त जानकारी नहीं थी।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने यह आदेश 2017 में दाखिल एक याचिका पर दिया।

याचिकाकर्ता सुशील कुमार श्रीवास्तव ने अधिवक्ता लिपिकों के कल्याण के लिए नीति बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

याचिका में बताया गया था कि अधिवक्ता लिपिक वकीलों के सचिवीय कार्यों के अलावा मुकदमों की फाइलिंग, अदालत की रजिस्ट्री के साथ समन्वय, प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने और याचिकाओं की कमियां दूर कराने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, इसके बावजूद उन्हें आम तौर पर सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सा या पेंशन जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं और उम्रदराज या असमर्थ होने पर सेवाएं समाप्त होने के बाद भी उन्हें कोई सुरक्षा लाभ नहीं मिलता।

अदालत ने वित्त विभाग की इस दलील को ‘‘स्पष्ट रूप से मनमाना’’ बताया कि ऐसी कल्याणकारी नीति लागू करने से राज्य पर वित्तीय बोझ पड़ेगा।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता का स्पष्ट पक्ष है कि राज्य पर कोई वित्तीय दायित्व डालने की आवश्यकता नहीं है बल्कि वकालतनामा पर लगाए जाने वाले टिकट या स्टांप से निर्धारित राशि एक कल्याण कोष में जमा कर उसका इस्तेमाल अधिवक्ता लिपिकों के हित में किया जा सकता है।

अदालत ने पुरानी समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

पीठ ने कहा कि समिति के किसी सदस्य को अधिवक्ता लिपिकों के काम की जानकारी नहीं थी, सिवाय बार काउंसिल के अध्यक्ष के।

पीठ ने कहा कि समिति ने उनकी सिफारिशों पर भी विचार नहीं किया।

अदालत ने निर्देश दिया कि नई समिति में उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता या उनके द्वारा नामित अनुभवी अपर महाधिवक्ता, इलाहाबाद एवं लखनऊ पीठ से एक-एक वरिष्ठ अधिवक्ता तथा बार काउंसिल के अध्यक्ष द्वारा नामित एक सदस्य शामिल होगा।

आवश्यकता के अनुसार, संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव और विधि परामर्शदाता को भी समिति का सदस्य बनाया जा सकेगा।

पीठ ने मुख्य सचिव को चार सप्ताह के भीतर समिति गठित करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि समिति अधिवक्ता लिपिकों की समस्याओं पर विचार कर अपनी सिफारिशें सरकार को देगी और पूरी प्रक्रिया अधिकतम तीन महीने में पूरी कर समिति की रिपोर्ट हलफनामे के माध्यम से उच्च न्यायालय में दाखिल करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी।

भाषा सं जफर जितेंद्र

जितेंद्र


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