इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दी लखनऊ के रेहड़ी-पटरी के दुकानदारों को राहत

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दी लखनऊ के रेहड़ी-पटरी के दुकानदारों को राहत

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दी लखनऊ के रेहड़ी-पटरी के दुकानदारों को राहत
Modified Date: February 4, 2026 / 11:26 pm IST
Published Date: February 4, 2026 11:26 pm IST

लखनऊ, चार फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश की राजधानी के रेहड़ी-पटरी वालों को राहत देते हुए लखनऊ नगर निगम को निर्देश दिया कि ऐसे दुकानदारों को तब तक न हटाया जाए, जब तक ‘टाउन वेंडिंग कमेटी’ शहर भर का सर्वेक्षण करके प्रमाणपत्र जारी नहीं कर देती, बशर्ते ऐसी दुकानें यातायात में बाधा न डालें।

उच्च न्यायालय ने नगर निगाम को ‘वेंडिंग प्लान’ तैयार करने के लिए भी कहा। मामले की अगली सुनवाई तीन महीने बाद की जाएगी।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए.के. कुमार चौधरी की खंडपीठ ने अमीनाबाद इलाके के अमर कुमार सोनकर और अन्य रेहड़ी पटरी वालों की याचिका पर यह आदेश दिया।

पीठ ने कहा कि जब तक कानून के अनुसार सर्वे पूरा नहीं हो जाता, राज्य सरकार द्वारा वेंडिंग प्लान को मंजूरी नहीं मिल जाती और सभी पात्र रेहड़ी पटरी दुकानदारों को ‘वेंडिंग सर्टिफिकेट’ जारी नहीं हो जाते, तब तक ऐसे दुकानदारों को रेहड़ी पटरी दुकानदार (आजीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) अधिनियम 2014 की धारा 3(3) के तहत कानूनी सुरक्षा मिलती रहेगी।

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि हालांकि सर्वे पूरा हो गया था लेकिन अभी तक वेंडिंग प्रमाणपत्र जारी नहीं किए गए थे। इसके बावजूद उन्हें उनकी मौजूदा जगहों से हटाया जा रहा था जो उनके अनुसार अधिनियम के उद्देश्यों के विपरीत था।

भाषा सं. सलीम राजकुमार

राजकुमार


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