इलाहाबाद उच्च न्यायालय की किशोर गृहों के लिए धन जारी करने में विलंब को लेकर सरकार को फटकार
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की किशोर गृहों के लिए धन जारी करने में विलंब को लेकर सरकार को फटकार
लखनऊ, 27 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एनजीओ द्वारा मिशन वात्सल्य योजना के तहत संचालित किशोर गृहों को धन जारी करने में विलंब को लेकर बुधवार को भारी नाराजगी जाहिर की।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कहा कि प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं, बच्चों के जीवन, भोजन, चिकित्सा और कल्याण से ऊपर नहीं हैं। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि 29 मई तक कोई व्यवहारिक समाधान नहीं प्रस्तुत किया जाता है तो अदालत किशोरों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक आदेश पारित करने को बाध्य होगी।
यह आदेश 2008 में अनूप गुप्ता द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने पारित किया।
सुनवाई के दौरान, न्याय मित्र अपूर्व तिवारी ने पीठ को बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 शुरू हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन मिशन वात्सल्य के तहत काम कर रहे किशोर गृहों को अभी तक कोई धन नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि 200 से अधिक बच्चे दृष्टि सामाजिक संस्थान द्वारा संचालित गृहों में रह रहे हैं और मासिक खर्च करीब 80 लाख रुपये है, फिर भी अप्रैल से एक भी रुपया जारी नहीं किया गया है।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि नई एसएनए स्पर्श व्यवस्था लागू होने के कारण तकनीकी और प्रक्रियात्मक मुश्किलें पैदा हुई थीं। हालांकि, 12 मई को परियोजना मंजूरी बोर्ड की बैठक हुई जिसका विवरण अभी तक जारी नहीं किया गया जिसकी वजह से धन जारी नहीं किया जा सका।
सुनवाई के दौरान वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए पेश हुईं प्रमुख सचिव (महिला कल्याण विभाग) मनीषा त्रिघाटिया ने कहा कि सरकार निर्धारित प्रक्रिया के तहत बाध्य है और इसके इतर धन जारी नहीं किया जा सका।
इस पर अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत के संविधान के तहत बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना, राज्य सरकार का संवैधानिक दायित्व है। भाषा सं राजेंद्र शोभना
शोभना

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