Ayodhya Ram Mandir Donation Theft : राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा! सिर्फ अंदर से नहीं, बाहर से भी लग रही थी सेंध? बैंककर्मी जांच के घेरे में

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच के दौरान दो बैंक कर्मियों के नाम सामने आने की बात सूत्रों के हवाले से कही जा रही है। बताया जा रहा है कि दोनों चढ़ावे की गणना और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया से जुड़े थे। पुलिस जल्द कार्रवाई कर सकती है।

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  • Publish Date - June 29, 2026 / 11:39 AM IST,
    Updated On - June 29, 2026 / 11:47 AM IST

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft / Image Source : FILE

HIGHLIGHTS
  • बैंक की ओर से तीन महीने पहले भी शिकायत और कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की बात सूत्रों ने कही है।
  • एसआईटी की प्रारंभिक जांच में भी बैंक कर्मियों की भूमिका की ओर संकेत मिलने का दावा किया गया है।
  • पुलिस जल्द दोनों कर्मचारियों से पूछताछ या अन्य कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

अयोध्या : Ayodhya Ram Mandir Donation Theft अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की राशि चोरी होने के मामले में पुलिस और एसआईटी (SIT) की जांच में एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल में राम जन्मभूमि परिसर में तैनात दो बैंक कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस को इन दोनों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिल चुके हैं, जिसके बाद इन पर कभी भी कानूनी शिकंजा कस सकता है।

बैंक कर्मचारियों की भूमिका बेहद मुख्य

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case Updates पुलिस सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी में बैंक कर्मचारियों की भूमिका बेहद मुख्य रही है। इस प्रकरण में बैंक के दो कर्मचारियों, रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप की सीधी संलिप्तता की पुष्टि हुई है। दरअसल, मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि को गिनने और उसे बैंक में जमा करने की एक तय प्रक्रिया होती है। इस पूरी प्रक्रिया में चढ़ावे की गणना के लिए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को लगाया गया था, जबकि उनकी निगरानी की जिम्मेदारी बैंक कर्मी रत्नेश और गगनदीप की थी।

मिलीभगत से ही चढ़ावे की राशि में हेरफेर

इन्हीं दोनों अधिकारियों के सामने पूरी रकम की गिनती होती थी और फिर उसे बैंक में जमा कराया जाता था। आरोप है कि इन दोनों की मिलीभगत से ही चढ़ावे की राशि में हेरफेर और चोरी का यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा था। सूत्रों का यह भी कहना है कि बैंक प्रबंधन की तरफ से करीब 3 महीने पहले भी इन कर्मचारियों को लेकर एक शिकायत की गई थी और इन्हें पद से हटाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब एसआईटी की शुरुआती जांच और पुलिसिया तफ्तीश में दोनों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य मिलने के बाद उनकी गिरफ्तारी तय मानी जा रही है।

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