आनंद कुमार के बेटों को बसपा में पद पर रहकर राजनीति का मौका नहीं मिलेगा: मायावती

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आनंद कुमार के बेटों को बसपा में पद पर रहकर राजनीति का मौका नहीं मिलेगा: मायावती

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  • Publish Date - September 12, 2026 / 04:21 PM IST,
    Updated On - September 12, 2026 / 04:21 PM IST

लखनऊ, 12 सितंबर (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को कहा कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को पार्टी में किसी छोटे-बड़े पद पर रहते हुए राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने हालांकि वकालत की पढ़ाई कर रही अपनी भतीजी को भविष्य में पार्टी की जिम्मेदारी सौंपे जाने की संभावना खुली रखी है।

मायावती ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा के पूर्व सदस्य अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक और सामाजिक जीवन से ‘संन्यास’ लेने की घोषणा के बाद अपने भतीजे एवं सिद्धार्थ के दामाद आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया था।

उन्होंने इससे पहले सिद्धार्थ को भी बसपा से बाहर कर दिया था।

मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से मुक्त किए जाने के दो दिन बाद शनिवार को ‘एक्स’ पर एक लंबे और भावुक पोस्ट में अपने फैसले के कारण बताए तथा परिवार से जुड़े भविष्य के राजनीतिक फैसलों को भी स्पष्ट किया।

उन्होंने कहा कि अविवाहित होने के कारण उन्हें अपने सगे भाई-बहनों में से किसी एक और अंततः सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखने की जरूरत पड़ी।

आनंद मायावती की देखभाल करने के साथ लंबे समय से पार्टी की अहम जिम्मेदारियां भी निभा रहे हैं।

मायावती ने कहा, ‘‘अब उनके परिवार के लोग भी इसका लाभ उठाएं तो यह पार्टी और आंदोलन के हित में सही नहीं होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा है कि आनंद कुमार के खासकर किसी भी बेटे को बसपा में किसी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर भविष्य में आनंद कुमार को उनकी मदद के लिए किसी अन्य सदस्य की जरूरत पड़ती है, तो वह अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं, जो इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही हैं।

मायावती ने कहा कि दीपिका की ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता को देखते हुए भविष्य में उन्हें पार्टी में जरूरत के अनुसार जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर दीपिका इसके लिए तैयार नहीं होती हैं, तो आनंद कुमार पार्टी की आम सहमति से दलित वर्ग के किसी अन्य कर्मठ कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।

बसपा सूत्रों के अनुसार, आनंद कुमार पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

मायावती ने उन्हें 2017 में पहली बार इस पद पर नियुक्त किया था और उस समय यह शर्त रखी थी कि वह कभी सांसद, विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। मायावती ने कहा कि आनंद कुमार अपने दोनों बेटों या भविष्य में उनके बच्चों में से किसी को भी अपनी जिम्मेदारी नहीं सौंपेंगे।

उन्होंने इसे पार्टी और आंदोलन के हित में समय की जरूरत बताया।

चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती ने बसपा संस्थापक कांशीराम का जिक्र करते हुए कहा कि वह परिवारवाद के खिलाफ उनके रुख पर कायम हैं।

उन्होंने कहा कि अपनी सुरक्षा और अन्य परिस्थितियों के कारण उन्हें आनंद कुमार को अपने साथ रखना पड़ा लेकिन वह किसी भी तरह के मोह के कारण पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचने देंगी।

मायावती ने कहा कि युवाओं को प्राथमिकता देने की नीति के तहत पार्टी संगठन में ‘जेन-जी’ की करीब 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया लंबे समय से जारी है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में सर्वसमाज के कर्मठ एवं युवा प्रतिभाओं को उम्मीदवार बनाने को प्राथमिकता देने के निर्देश पर भी अमल किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी के जरिए आंबेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ाया जा सके।

भाषा आनन्द जितेंद्र

जितेंद्र