भागवत ने पश्चिमी देशों पर लगाया ‘जड़वाद’ फैलाने का आरोप, अमेरिका और चीन पर साधा निशाना

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भागवत ने पश्चिमी देशों पर लगाया 'जड़वाद' फैलाने का आरोप, अमेरिका और चीन पर साधा निशाना

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  • Publish Date - February 18, 2026 / 06:28 PM IST,
    Updated On - February 18, 2026 / 06:28 PM IST

लखनऊ, 18 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने पश्चिमी देशों पर ‘‘जड़वाद’’ फैलाने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि इन देशों की सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और जो भी बाधक बने उसे मिटा दो, और आज यही काम अमेरिका और चीन कर रहे हैं।

भागवत ने यह भी कहा कि भारत को अगर ‘विश्व गुरु’ बनना है तो उसे सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, भागवत ने लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित शोधार्थी संवाद कार्यक्रम में कहा कि वर्तमान में वैश्वीकरण का मतलब बाजारीकरण से है, जो खतरनाक है।

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिमी देशों ने जड़वाद फैलाया। उन देशों की सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और बाकी को छोड़ दो, जो बाधक बने उन्हें मिटा दो। यही काम आज अमेरिका और चीन कर रहे हैं।’’

भागवत ने कहा कि आज दुनिया भर की समस्याओं का जवाब भारत के पास है, मगर यदि उसे विश्व गुरु बनना है तो सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा, क्योंकि दुनिया तभी मानती है जब सत्य के पीछे शक्ति हो।

संघ प्रमुख ने शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यवसायीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकताएं है और यह व्यवसाय नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सबके लिए सुलभ होने चाहिए।

भागवत ने अंग्रेजों पर भारत की शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम के लोगों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था हटाकर अपनी व्यवस्था थोपी, जिससे उन्हें काम करने के लिए ‘‘काले अंग्रेज’’ मिल जाएं।

उन्होंने कहा, ‘‘अंग्रेजों ने जो बिगाड़ा उसको ठीक करना होगा।’’

आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘संघ का कार्य देश को परम वैभव सम्पन्न बनाना है और संघ को समझना है तो संघ के अंदर आकर कर देखें, क्योंकि संघ को पढ़ कर नहीं समझा जा सकता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘संघ को सम्पूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने वाला एक ही काम करना है। संघ किसी के विरोध में नहीं है। संघ को लोकप्रियता, प्रभाव और शक्ति नहीं चाहिए।’’

भागवत ने शोध की भूमिका के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की बड़ी भूमिका है। उन्होने शोधार्थियों से कहा कि जो भी शोध करें उसे उत्कृष्ट रूप से, प्रामाणिकता पूर्वक और निःस्वार्थ भाव से देश के लिए करें।

संघ प्रमुख ने कहा कि संघ को लेकर बहुत ‘‘दुष्प्रचार’’ होता है, और शोधार्थियों को सत्य सामने लाना चाहिए।

उन्होंने धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘‘सृष्टि जिन नियमों से चलती है वह धर्म है। धर्म सबको सुख पहुंचाता है। हमारी सभी बातों में धर्म लागू है।’’

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) संबंधी नये नियमों को लेकर जारी बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं से मुलाकात की।

कार्यक्रम से पहले कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के सदस्यों ने भागवत के विश्वविद्यालय के दौरे के खिलाफ प्रदर्शन किया।

एनएसयूआई की उत्तर प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष अहमद रजा खान ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि संगठन का यह प्रदर्शन भागवत के लखनऊ विश्वविद्यालय आगमन के विरोध में था।

उन्होंने आरोप लगाया कि संघ ने समाज के ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया है, ऐसे में संघ प्रमुख का एक ऐसे विश्वविद्यालय में जाना सही नहीं है जो धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है।

प्रदर्शन में शामिल रहे खान ने कहा कि उनके साथ शामिल हुए पांच और लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।

एक पुलिस अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों को स्थानीय हसनगंज थाने ले जाया गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर उन्हें कुछ देर के लिए हिरासत में रखा गया।

भाषा सलीम शफीक

शफीक