जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है : भगवत

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जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है : भगवत

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 11:24 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 11:24 PM IST

लखनऊ, 17 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सर संघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को वैज्ञानिकों के हवाले से कहा कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार आरएसएस के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक में बोलते हुए वैज्ञानिकों के हवाले से कहा कि “जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है। यह बात हमारे परिवारों में नव दंपतियों को बताई जानी चाहिए।”

डॉ. भागवत ने कहा कि विवाह का उद्देश्य सृष्टि आगे चले, यह होना चाहिए, वासना पूर्ति नहीं। इसी भावना से कर्तव्य बोध आता है।

उन्होंने कहा, “हिंदू समाज को संगठित औऱ सशक्त होने की आवश्यकता है। हमको किसी से खतरा नहीं है, लेकिन सावधान रहना है।”

हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने लालच और जबरदस्ती हो रहे मतांतरण पर रोक लगाने की बात कही।

उन्होंने कहा, ‘‘घर वापसी का काम तेज होना चाहिए। जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा। बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा। उन्हें रोजगार नहीं देना है।

उन्होंने कहा कि सद्भाव ना रहने से भेदभाव होता है। हम सभी एक देश, एक मातृभूमि के पुत्र हैं। मनुष्य होने के नाते हम सब एक हैं। एक समय भेद नहीं था, लेकिन समय चक्र के चलते भेदभाव की आदत पड़ गई है, जिसे दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि सनातन विचारधारा सद्भाव की विचारधारा है।

भागवत ने कहा कि घर-परिवार का आधार मातृशक्ति है। हमारी परंपरा में कमाई का अधिकार पुरुषों को था, लेकिन खर्च कैसे हो, यह मातायें तय करती थी।

यूजीसी गाइडलाइन को लेकर किए गए एक प्रश्न के उत्तर में संघ प्रमुख ने कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए, यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है। जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए।

भागवत ने कहा कि भारत निकट भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देगा। विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान भारत के पास ही है।

उन्होंने समाज की सज्जन शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि बस्ती स्तर पर सामाजिक सद्भाव से जुड़ी बैठकें नियमित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं। इससे हमें सावधान रहना होगा। एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा।

निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मन्दिर के माधव सभागार में ‘कार्यकर्ता कुटुम्ब मिलन’ कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि मन्दिर कुआं और श्मशान सभी हिन्दुओं के लिए खुले होने चाहिए और उनमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों को बताना होगा कि करियर क्या है, पेट भरना, ज्यादा कमाना, उपभोग करना करियर नहीं है। करियर कमाने से ज्यादा बांटने में है। बच्चों को ऐसी शिक्षा दें जो अमीर होकर दान दें, दूसरों के लिए जीना सीखें।

सरसंघचालक ने कहा, ‘‘सामाजिक समरसता के लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर प्रयास होने चाहिए। संघ सारे हिन्दू समाज को एक मानता है। इसलिए हमें व्यक्तिगत स्तर पर और पारिवारिक स्तर पर आपसी मेलजोल बढ़ाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता भाषण से नहीं, करने से आएगी। संघ के कुटुम्ब में जात-पात नहीं है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज की इकाई व्यक्ति नहीं परिवार है। सामाजिक व्यवहार का परीक्षण परिवार में होता है।

सरसंघचालक ने कहा कि 100 से 70 की संख्या में कुटुम्ब मिलन बस्ती और शाखा स्तर पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम तकनीक को नहीं रोक सकते लेकिन इसका उपयोग अनुशासन में रहकर हो।

कार्यक्रम में सिक्ख,बौद्ध,जैन समाज के साथ ही रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम, आर्ट ऑफ लिविंग, संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम, ब्रह्म विद्या निकेतन, सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए।

भाषा आनन्द रंजन

रंजन