मुख्यमंत्री ने काशी में मणिकर्णिका घाट के साथ ही राजमाता अहिल्याबाई की मूर्ति को तुड़वा दिया: अखिलेश

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मुख्यमंत्री ने काशी में मणिकर्णिका घाट के साथ ही राजमाता अहिल्याबाई की मूर्ति को तुड़वा दिया: अखिलेश

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 08:02 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 08:02 PM IST

लखनऊ, 17 फरवरी (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने काशी में मणिकर्णिका घाट के साथ ही राजमाता पूज्य अहिल्याबाई की मूर्ति को तुड़वा दिया है।

एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, यादव ने दावा किया कि सनातन समाज और पाल समुदाय के सदस्य इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से ‘‘बहुत नाराज’’ हैं।

अखिलेश ने कहा, ‘‘इन्होंने काशी में करीब सौ मंदिर भी तोड़े हैं। नेपाल नरेश का दान किया हुआ घंटा भी गायब हो गया है।’’

समाजवादी पार्टी की सरकार में शंकराचार्य पर वाराणसी में लाठीचार्ज के योगी आदित्यनाथ के बयान पर यादव ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री कुछ नहीं जानते हैं, समाजवादी पार्टी की सरकार में काशी में वह घटना गलत परिस्थितियों और भाजपा की वजह से हुई थी, तब पूज्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महराज, शंकराचार्य नहीं थे। लेकिन उस घटना के बाद पूज्य शंकराचार्य जी से हम लोगों ने क्षमा मांगते हुए अपनी गलती स्वीकार कर ली थी। हम लोग शंकराचार्य जी के साथ हैं।’’

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने शंकराचार्य को गंगा में स्नान नहीं करने दिया और मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य को पवित्र त्रिवेणी पर अपमानित करने का काम किया।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया, ‘‘यह सच है कि लोगों में झगड़ा लगाना, उपद्रव कराना, आगजनी कराना, नफरत फैलाना यह सब मुख्यमंत्री जी का काम रहा है। मुख्यमंत्री पर यह सब धाराएं थीं। मै तो इतना ही कह रहा हूं लेकिन शंकराचार्य जी ने तो यहां तक कहा कि लोकतंत्र के मंदिर में मुख्यमंत्री गुंडई की भाषा बोल रहे हैं।’’

सपा मुख्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है।

सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा सरकार में जल जीवन मिशन में बन रही पानी की टंकियां भ्रष्टाचार का भार नहीं शह पा रही हैं। टंकियां ढह जा रही हैं। मुख्यमंत्री जब लखीमपुर में थे तब भी वहां पानी की टंकी ढह गयी थी। आगरा में ढह गयी। टंकियां जिले-जिले में गिर रही हैं।’’

भाषा आनन्द शफीक

शफीक