Reported By: Saurabh Singh Parihar
,Chhattisgarh Rajya Sabha Seat || Image- Related Social Media Files
रायपुर: छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव का ऐलान हो चुका है और इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। 9 अप्रैल 2026 को केटीएस तुलसी और फुलोदेवी नेताम का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, जिसके चलते दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। (Chhattisgarh Rajya Sabha Seat) माना जा रहा है कि संख्याबल के आधार पर एक सीट भाजपा के खाते में जाएगी, जबकि दूसरी सीट कांग्रेस को मिल सकती है। भाजपा में हमेशा की तरह नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है और चर्चा है कि इस बार भी पार्टी आखिरी समय में चौंकाने वाला नाम सामने ला सकती है।
दूसरी ओर कांग्रेस में बाहरी बनाम छत्तीसगढ़िया का मुद्दा फिर से जोर पकड़ता दिख रहा है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस पहले भी बाहरी नेताओं को राज्यसभा भेजती रही है। इस मुद्दे पर कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव ने कांग्रेस पर तंज कसा है। वहीं कांग्रेस के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और गिरीश देवांगन जैसे नामों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि भूपेश बघेल ने साफ कहा है कि राज्यसभा सांसद को लेकर अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान ही करेगा।
राज्यसभा की इन दो सीटों ने प्रदेश की सियासत का तापमान बढ़ा दिया है। भाजपा जहां सरप्राइज नाम लाने की रणनीति पर काम करती दिख रही है, वहीं कांग्रेस पर छत्तीसगढ़िया कार्ड खेलने का दबाव नजर आ रहा है। फिलहाल सीटें खाली नहीं हुई हैं, (Chhattisgarh Rajya Sabha Seat) लेकिन बयानबाजी से माहौल पूरी तरह गर्म है। अब देखना होगा कि इस बार राज्यसभा का फैसला रायपुर से तय होगा या फिर दिल्ली से।
गौरतलब है कि, इस साल देशभर के 22 राज्यों की 72 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से 33 सीटें अप्रैल में खाली हो जाएंगी। इन 72 में से एनडीए के पास 28 सीटें हैं। विधानसभा के आंकड़ों के देखें तो एनडीए 48 सीटों तक पहुंच सकता है। (Chhattisgarh Rajya Sabha Seat) 72 में से 33 सांसदों का कार्यकाल अप्रैल में पूरा हो रहा है। इनमें 2 छत्तीसगढ़ की सीटें भी शामिल हैं। ये दोनों सीटें कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी के पास हैं। 9 अप्रैल को पूरे हो रहे इस कार्यकाल के लिए नियमानुसार मार्च दूसरे सप्ताह तक चुनाव कार्यक्रम जारी हो जाना चाहिए।
अब सवाल ये है कि छत्तीसगढ़ से राज्यसभा भेजा किसे जाएगा। कांग्रेस ने साल 2022 में रंजीता रंजन और राजीव शुक्ला को भेजकर भाजपा के हाथों बाहरी-स्थानीय का मुद्दा थमा दिया था। इसलिए इस बार इस पिच पर दोनों ही दल खेल नहीं पाएंगे। (Chhattisgarh Rajya Sabha Seat) आंकड़े कहते हैं, छत्तीसगढ़ में एक राज्यसभा सीटे के लिए 31 विधायकों की जरूरत है। इस लिहाज से कांग्रेस के पास एक सीट जीतने का बल है। भाजपा के पास 54 विधायक हैं, जिनमें दो सीटें नहीं जीती जा सकती, लेकिन एक आराम से जीत सकते हैं। इन सभी मसलों को समझने के लिए चरणबद्ध तरीके से बात करते हैं।
छत्तीसगढ़ में राजनीतिक जोड़-तोड़ का सकारात्मक इतिहास नहीं है। दूसरी बात भाजपा को कम से कम 8 कांग्रेस विधायक तोड़ने होंगे, जो कि छत्तीसगढ़ में लाख असहमतियों के बीच भी संभव नहीं है।
कांग्रेस की आलोचना के कारण भाजपा पहल नहीं करेगी, लेकिन कांग्रेस ने अगर किया तो भाजपा भी पीछे नहीं रहेगी।
भाजपा ने पिछली बार राज्यसभा भेजने के लिए आदिवासी फॉर्मूला अपनाया था। उत्तरी छत्तीसगढ़ से भेजा गया है। जाहिर है इस बार या तो मध्य से होना चाहिए या दक्षिण से और या तो दलित वर्ग से हो या सामान्य। (Chhattisgarh Rajya Sabha Seat) सामान्य में भी यूजीसी जैसे मसलों को डायल्यूट करने के लिए ब्राह्मण पर दांव खेल सकती है। इसके अलावा एक फॉर्मूल एज का भी हो सकता है। एक बाहरी का भी हो सकता है।
भाजपा के पास बाहर से भेजने के लिए नितिन नबीन हैं। बिहार में भी इस 5 सीटों पर चुनाव है। आंकड़े कहते हैं एनडीए इन पांचों पर जीत सकती है। तो जाहिर है भाजपा के पास विकल्प है। वह नहीं चाहेगी बाहरी की तोहमत ले। अगला नाम ओपी चौधरी हो सकते हैं। फिलहाल सफल वित्तमंत्री हैं। चौधरी नीति, व्यवहार को समझते हैं। आईएएस रह चुके हैं। उनका मिजाज भी बड़े फलक पर काम करने का है। राज्य की राजनीति में वे फंसे-फंसे भी नजर आते हैं। मोदी चाहेंगे उनका इस्तेमाल इस सदी के दूसरे क्वार्टर को मजबूत करने में करें। विजन 2047 पर भी उनका अच्छा इनवॉल्वमेंट है। लेकिन वे भी रायगढ़ से हैं जहां से पिछली बार राजा देवेंद्र प्रताप सिंह भेजे गए थे। कोई दूसरा मंत्री भी हो सकता है। एक संभावना यह है कि मंत्री न हो तो बड़े नेताओं में ओबीसी से लक्ष्मी वर्मा का लगभग तय मानना चाहिए। यूजीसी विवाद को ठंडा करना हो तो सरोज पांडेय इकलौता नाम है। ब्राह्मण हैं, महिला हैं, वायब्रेंट हैं, निर्विवाद हैं। विधायकों की संख्या भी नहीं घटेगी।
कांग्रेस में सारी चीजें गांधी परिवार से तय होती हैं, इसलिए कयास मुश्किल है। ओबीसी से ताम्रध्वज साहू, टीएस सिंहदेव सामान्य वर्ग पर दांव लगा सकती है। कांग्रेस किसी मौजूदा विधायक को नहीं भेजेगी। मोहम्मद अकबर भी पार्टी की च्वाइस हो सकते हैं। (Chhattisgarh Rajya Sabha Seat) कांग्रेस की आंतरिक रणनीति में असम, बंगाल, यूपी में मुस्लिम वोटर्स पर फोकस वर्किंग पर चर्चा हुई है।