लखनऊ, 11 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुधवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव रखते हुए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने विपक्ष के रवैये पर तीखा प्रहार किया।
उन्होंने कहा, “एक मातृ स्वरूप महिला आदरणीय राज्यपाल जी का इन लोगों ने जो विरोध किया, उसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है।”
वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ सदस्य शिवपाल सिंह यादव समेत अन्य विधायकों ने अभिभाषण की आलोचना करते हुए कहा कि अभिभाषण में दावे अधिक हैं, जमीनी सच्चाई गायब है।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन विधानसभा के सभागार में विधान परिषद और विधानसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए सरकार की उपलब्धियों का ब्योरा दिया।
सपा सदस्यों के विरोध के बीच राज्यपाल ने करीब 30 मिनट में अपना अभिभाषण पूरा किया।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार की सिलसिलेवार उपलब्धियां गिनाईं और इस दौरान सपा सदस्य लगातार विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने आकर नारेबाजी और हंगामा करते रहे।
राज्यपाल ने सपा सदस्यों से नारेबाजी बंद कर अपनी-अपनी सीट पर बैठने का तीन बार आग्रह किया, लेकिन विरोध जारी रहा।
बुधवार को भाजपा के वरिष्ठ सदस्य एवं पूर्व मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव रखते हुए कहा, “मैं कृतज्ञता पूर्वक उन्हें धन्यवाद प्रकट करता हूं।”
उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में उप्र के प्रत्येक मानविकी के सुख की परिकल्पना, समाज के प्रत्येक वर्ग के सुख की अभिलाषा, उप्र को उत्तम प्रदेश बनाने की भाव भूमि की रचना, उप्र को ‘एक ट्रिलियन डॉलर’ (एक हजार अरब डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए किये जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से पूरी विवेचना की।
तिवारी ने कहा कि राज्यपाल ने गरीब के लिए, किसान के लिए, वंचित समाज के लिए, महिला के लिए, नौजवान और रोजगार के लिए, समाज के हर तबके के लिए अंत्योदय की परिकल्पना को साकार करने की पहल की।
विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “एक मातृ स्वरूप महिला आदरणीय राज्यपाल जी का विपक्ष ने जो विरोध किया, उसकी जितनी निंदा की जाए, कम है। ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसा लगता है कि समाज ने इन्हें (विपक्ष को) बहिष्कृत कर दिया है और उसी का विक्षोभ वे व्यक्त कर रहे थे।”
धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए भाजपा के सदस्य डॉ नीरज बोरा ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण कोई औपचारिकता नहीं है, यह सरकार की नीति, नीयत और भविष्य का संवैधानिक दस्तावेज है।
बोरा ने कहा कि यह अभिभाषण उस जनादेश की आवाज है जो उप्र की जनता ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के नेतृत्व की सरकार को दिया है।
अभिभाषण की आलोचना करते हुए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य शिवपाल सिंह यादव ने कहा, ”अभिभाषण सुनकर ऐसा लगा मानो प्रदेश में कोई समस्या है ही नहीं। न कोई बेरोजगार है, न कहीं किसान परेशान है और न महिला असुरक्षित है, लेकिन यह अभिभाषण उप्र की जनता का सच नहीं है। दरअसल, यह सरकार के प्रचार विभाग का दस्तावेज बन कर रह गया है।”
यादव ने कहा कि कागज पर विकास है, जमीन पर निराशा है और सदन में सिर्फ आत्मप्रशंसा एवं सरकार का खुद का गुणगान है।
उन्होंने कहा, “इसमें जनता की सच्चाई, युवाओं का दर्द, किसानों की तकलीफ, महिलाओं की सुरक्षा और गरीबों की चिंता कहीं नजर नहीं आती है। अभिभाषण में दावे अधिक हैं, जमीनी सच्चाई गायब है।”
उन्होंने चुनौती भरे अंदाज में कहा, “अगर गांवों का विकास देखना हो तो आइए, हमारा पूरा क्षेत्र देख लीजिए। आप लोग सैफई की बात करते हैं, जो कहा सो किया।’‘
यादव ने पिछले कई वर्षों से सरकार पर अपनी विधानसभा क्षेत्र (जसवंतनगर) की उपेक्षा का आरोप लगाया।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य ओमप्रकाश सिंह ने अभिभाषण की आलोचना करते हुए कहा, “यह झूठ का पुलिंदा है। राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की विदाई का अभिभाषण है।”
भाषा आनन्द नोमान
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