लखनऊ में एसजीपीजीआई में भर्ती मरीज का खून से लथपथ गला कटा शव बरामद

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लखनऊ में एसजीपीजीआई में भर्ती मरीज का खून से लथपथ गला कटा शव बरामद

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  • Publish Date - May 18, 2026 / 06:39 PM IST,
    Updated On - May 18, 2026 / 06:39 PM IST

लखनऊ, 18 मई (भाषा) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती एक मरीज का सोमवार तड़के खून से लथपथ शव बरामद किया गया, जिसका गला कटा हुआ था। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अमित कुमार आनन्‍द ने पत्रकारों को बताया कि मृतक की पहचान बस्ती जिले के निवासी मुश्‍ताक अली (61) के रूप में हुई जो लीवर कैंसर से पीड़ित था।

डीसीपी ने बताया कि सोमवार को पीजीआई थाना क्षेत्र में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती बस्ती जिले के निवासी एक मरीज मुश्‍ताक अली (61) की गला कटने से मौत की सूचना मिली थी।

उन्‍होंने कहा कि सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पुलिस पहुंची।

आनन्द ने बताया कि पूछताछ में यह पता चला कि करीब चार-साढ़े चार बजे उसके बगल के बेड पर भर्ती मरीज के तीमारदार ने देखा कि मुश्‍ताक के गले से खून निकल रहा है, तत्काल सूचना स्टाफ एवं पुलिस को दी गई।

डीसीपी ने बताया कि उसके बगल में एक ब्‍लेड पड़ा था और वह पिछले एक माह से पीजीआई में भर्ती था। उन्‍होंने कहा कि वह लीवर कैंसर से ग्रसित था और लगभग आठ-नौ माह से उपचाराधीन था।

उन्‍होंने यह भी बताया कि यह आर्थिक तंगी में भी था। डीसीपी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस सभी पहलुओं की छानबीन कर रही है।

बाद में एक बयान में एसजीपीजीआई ने कहा कि बस्ती के रहने वाले मरीज़ मुश्ताक अली (61) को 21 अप्रैल, 2026 को गैस्ट्रो सर्जरी वार्ड में डॉ. आशीष सिंह की देखरेख में गॉल ब्लैडर के एडवांस्ड एडेनो कार्सिनोमा के फॉलो-अप केस के तौर पर भर्ती किया गया था। 17 मई की रात को उनकी हालत स्थिर थी, वे आराम से थे और सभी स्टाफ से अच्छे से बात कर रहे थे।

बयान के अनुसार ’18 मई की सुबह, पास के बेड पर मौजूद एक मरीज के रिश्तेदार ने जानकारी दी कि मरीज़ मुश्ताक अली की तबीयत खराब है, जिसके बाद वार्ड के नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत मरीज़ को देखा। जांच करने पर, मरीज़ की नब्ज और बीपी नहीं मिल रहा था, वे कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे और उनकी गर्दन के दाईं ओर एक गहरा कटे का निशान था, जिससे उनके सिर, बेड और जमीन पर काफी खून फैला हुआ था।

बयान के अनुसार वार्ड के नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत सीपीआर शुरू किया और वार्ड के रेजिडेंट डॉक्टर को सूचना दी गई। वार्ड के रेजिडेंट डॉक्टर भी मरीज़ को होश में लाने की कोशिश में शामिल हो गए। 15 मिनट तक सीपीआर (प्रोटोकॉल के अनुसार) देने के बाद भी मरीज़ को बचाया नहीं जा सका।आगे की जांच के लिए तुरंत पुलिस को सूचित कर दिया गया था।”

भाषा आनन्द रंजन

रंजन