मणिकर्णिका घाट की ‘फर्जी’ तस्वीरें फैलाने के आरोप में संजय सिंह व पप्पू यादव समेत 8 लोगों पर मुकदमा
मणिकर्णिका घाट की 'फर्जी' तस्वीरें फैलाने के आरोप में संजय सिंह व पप्पू यादव समेत 8 लोगों पर मुकदमा
वाराणसी (उप्र), 18 जनवरी (भाषा) वाराणसी पुलिस ने मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्यों के बारे में सोशल मीडिया पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से निर्मित तस्वीरें, वीडियो और भ्रामक जानकारी प्रसारित करने के आरोप में आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेता पप्पू यादव सहित आठ लोगों के खिलाफ आठ प्राथमिकी दर्ज की हैं। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव बंसल ने बताया कि घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण और श्मशान सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण से संबंधित मनगढ़ंत सामग्री फैलाने के आरोप में आठ व्यक्तियों और कुछ ‘एक्स हैंडल’ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
वाराणसी के चौक थाने में शनिवार को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद ‘आप’ सांसद संजय सिंह ने पत्रकारों से कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र में मणिकर्णिका घाट को तहस नहस किया गया, मंदिरों को तोड़ा गया, काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराने वाली माता अहिल्याबाई होल्कर जी की प्रतिमा भी तोड़ी गई जिसका विरोध काशी के साधुओं ने किया, अहिल्याबाई होल्कर जी के परिवार ने किया। यहां तक कि लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन जी ने भी विरोध दर्ज कराया। मगर मेरे खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।”
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, ”मंदिरों को तोड़ने वाले पापियों पर कारवाई करो, मुझे डराने की कोशिश मत करो।”
सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि मणिकर्णिका घाट को लेकर भ्रामक वीडियो और एआई से बनी तस्वीरें बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में वाराणसी पुलिस ने चौक थाने में कुल आठ प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें ‘आप’ सांसद संजय सिंह, कांग्रेस नेता पप्पू यादव व जसविंदर कौर शामिल हैं।
उन्होंने कहा ”आरोप है कि इन लोगों ने जानबूझकर भ्रामक सूचना फैलाकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया।
त्रिपाठी ने बताया कि मणिकर्णिका घाट से जुड़ा एक फर्जी और भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिसमें एआई तकनीक का उपयोग कर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया।
अधिकारी ने बताया कि इसके साथ ही एआई से बनी तस्वीरें भी साझा की गईं, जिससे आमजन में भ्रम और आक्रोश की स्थिति उत्पन्न हुई।
उन्होंने कहा कि जांच में सामने आया है कि इस मामले में पोस्ट करने, रीट्वीट करने और आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले लोग भी शामिल हैं। पुलिस ने इसे संगठित तरीके से अफवाह फैलाने की कोशिश माना है।
पुलिस का कहना है कि यह कार्य केवल भ्रामक सूचना फैलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे धार्मिक भावनाएं भड़काने का गंभीर प्रयास किया गया, जो दंडनीय अपराध है। इसी आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
भाषा सं आनन्द नोमान
नोमान

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