मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने छात्रों को दी तंज भरी नसीहत

मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने छात्रों को दी तंज भरी नसीहत

मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने छात्रों को दी तंज भरी नसीहत
Modified Date: June 1, 2026 / 01:55 pm IST
Published Date: June 1, 2026 1:55 pm IST

लखनऊ, एक जून (भाषा) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माध्यमिक एवं उच्च्तर माध्यमिक परीक्षाओं में छात्राओं के मुकाबले छात्रों की कम संख्या के मद्देनजर सोमवार को कहा कि छात्राएं घर के काम में सहयोग करने के बावजूद बेहतर अंक प्राप्त कर रही हैं लिहाजा छात्रों को उनका अनुसरण करना चाहिए।

माध्यमिक शिक्षा विभाग की परीक्षाओं में उच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र एवं छात्राओं के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने मेधा सूची में छात्राओं के मुकाबले छात्रों की कम संख्या होने का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘इस अवसर पर मैं देख रहा था कि इस समारोह मे 223 छात्र-छात्राओं का सम्मान किया जा रहा है, जिनमे छात्रों की संख्या 85 है और छात्राओं की संख्या 138 है, यानी छात्राओं की संख्या मेधा सूची में अधिक है, छात्र कम हैं। प्रदेश स्तर पर हाईस्कूल की परीक्षा में 115 बच्चों में 34 छात्र हैं, 81 छात्राएं हैं। इंटरमीडिएट की टॉप की सूची में देखें तो छात्र नौ हैं, छात्राएं 14 हैं।’

आदित्यनाथ ने कहा, ‘यह संख्या बताती है कि छात्राएं ज्यादा मेहनत करती हैं और ज्यादा मेहनत करके ज्यादा अंक प्राप्त करने की सामर्थ्य भी रखती हैं। जबकि हम लोग यह मानते थे कि छात्राएं घर में अपनी माता का भी सहयोग करती हैं।’

मुख्यमंत्री ने तंज भरे लहजे में कहा, ‘लेकिन लगता है कि अब परिवर्तन आ गया है और छात्र घर में झाड़ू-पोछा ज्यादा लगाने लग गए हैं… या लगता है कि मां-बाप उनसे ज्यादा काम ले रहे हैं, सब्जी लेने के लिए भेजते होंगे। घर और मोहल्ले में भी हो सकता है कि कुछ झाड़ू लगा रहे होंगे। इसीलिए छात्रों के अंक इतने कम हैं और छात्राएं मेहनत कर रही हैं और मेरिट स्थान में उन्होंने अच्छा स्थान प्राप्त किया है।’

आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि यह एक सुखद लक्षण है, लेकिन छात्रों के लिए भी एक प्रेरणा भी होनी चाहिए कि छात्राएं घर में परिवार का सहयोग करते हुए भी अच्छे अंक प्राप्त कर रही हैं और मेरिट में ज्यादा संख्या में स्थान प्राप्त कर रही हैं, तो छात्रों को कम से कम उनका ही अनुसरण कर लेना चाहिये।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बालिकाओं की शिक्षा की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ‘मेरा मानना है कि बेटी पढ़ेगी तो आगे बढ़ेगी और देश और समाज को भी आगे बढ़ाएगी, यह इस रिजल्ट के माध्यम से एक संदेश बहुत स्पष्ट आ गया हम सबके सामने है।’

आदित्यनाथ ने कहा कि हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं की आयु ऐसी है कि इसी समय उन्हें सही दिशा प्रदान करनी चाहिए तभी उनका भविष्य उज्ज्वल होगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे का अभिभावक उसका पहला गुरु होता है लेकिन आज हो क्या रहा है हम लोग अक्सर देखते हैं कि बच्चा रो रहा है तो माता-पिता उसको संतुष्ट करने के लिए उसे अपना स्मार्टफोन दे देते हैं।

आदित्यनाथ ने आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को ऐसे दूसरे कार्यों के साथ जोड़ा जाए जो उसका रचनात्मक विकास कर सकें।

उन्होंने कहा, ‘दो-तीन वर्ष के बच्चे को आप स्मार्टफोन पकड़ा रहे हैं, वीडियो गेम के साथ जोड़ रहे हैं। उसके घातक परिणाम भी हम सबको देखने को मिल रहे हैं। हम सबको यह बातें याद रखनी होगी कि भारत में ज्ञान की कितनी समृद्धि परंपरा रही है। विद्या को भारत ने बहुत विस्तृत रूप से माना है।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा हमारे जीवन में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है और वह उन चुनौतियों से जूझने के लिए हमें प्रेरणा देती है जो समाज और राष्ट्र के सामने आ खड़ी हुई है। या आती हुई दिखाई दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा ने कभी चुनौतियों से पलायन का रुख नहीं अपनाया।

आदित्यनाथ ने जीवन में गुरु के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि प्राचीन काल से देखें तो राम तब राम बने जब गुरु वशिष्ठ थे, राम के पास दिव्य अस्त्र तब आए जब गुरु विश्वामित्र थे, राम को मर्यादा के आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना है तब जब गुरु के रूप में महर्षि वाल्मीकि थे, भारत की एकता को उत्तर से दक्षिण तक निर्बाध रूप से आगे बढ़ाना है यह तब संभव हो पाया जब गुरु के रूप में महर्षि अगस्त्य जैसा ऋषि है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘कृष्ण तब कृष्ण बन पाए जब गुरु संदीपन आए। याद रखना, युग अलग-अलग हो सकता है लेकिन समय के अनुरूप मुरली की आवश्यकता वृंदावन में थी लेकिन धर्म की स्थापना के लिए सुदर्शन भी आवश्यक है और संदीपन ने महसूस किया था और कृष्ण के हाथों से मुरली वृंदावन में रखवा कर कहा कि सुदर्शन लेकर निकल पड़ो तभी धर्म की स्थापना होगी. तभी यह देश सुरक्षित होगा और इस भाव के साथ जब इस प्रकार की प्रेरणा आप (गुरुजन) दे पाएंगे, तब राष्ट्र के रूप में एक लंबी यात्रा को हम आगे बढ़ा पायेंगे।’

भाषा सलीम मनीषा रंजन

रंजन


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