CM Yogi Adityanath News/Image Credit: IBC24.in
CM Yogi Adityanath News: लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ आज भी समाज और राष्ट्र का मार्गदर्शन करती है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है तो जातिवाद के नाम पर समाज को बांटने वाली शक्तियों से सावधान रहना होगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने जातिवाद के नाम पर समाज को कमजोर करने वालों के खिलाफ आगाह किया और ‘‘देशद्रोहियों’’ के खिलाफ सतर्क रहने की जरूरत पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने रामधारी सिंह दिनकर की 52वीं पुण्यतिथि और उनकी कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ के प्रकाशन के 75 वर्ष होने के उपलक्ष्य में लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी महोत्सव’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘‘राष्ट्रकवि दिनकर की कालजयी काव्य कृति ‘रश्मिरथी’ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। साहित्य के ऐसे सशक्त साधक के प्रति हम सब अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए प्रदेश की राजधानी में एकत्र हैं।’’ (CM Yogi Adityanath News) उन्होंने कहा, ‘‘ यहां हम उनकी कालजयी काव्यकृति पर आधारित नाट्य-शृंखला का मंचन देखेंगे। हम देखेंगे कि किस प्रकार मां सरस्वती दिनकर जी की जिह्वा पर विराजती थीं और उनकी लेखनी शब्दों को पिरोती थी। यह सब ‘रश्मिरथी’ के इस मंचन के माध्यम से हम सभी को देखने-सुनने को मिलेगा। इस अवसर पर दिनकर जी की स्मृतियों को नमन करते हुए मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमें याद रखना चाहिए कि यदि हम अपनी स्वतंत्रता को संरक्षित करना चाहते हैं, एक विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की आकांक्षा रखते हैं, तो हमें उन गद्दारों के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए, जो देश को लूटते हैं और जातिवाद के नाम पर समाज को कमजोर करते हैं। यह प्रेरणा संदेश दिनकर जी ने दशकों पहले हमें दिया था।’’ आपातकाल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जब भारत के अंदर, भारत के लोकतंत्र का गला घोटने का प्रयास हुआ था। तब भी दिनकर जी ने यह आह्वान किया कि ‘‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’’। (CM Yogi Adityanath News) उन्होंने कहा, ‘‘भारत हमेशा से धन और संसाधनों में प्रचुर रहा है। यह एक वैश्विक शक्ति रही है। फिर भी भारत ने सैकड़ों वर्षों तक गुलामी भी झेली है। बल, बुद्धि और वैभव में भारत का मुकाबला कोई नहीं कर सकता। हालांकि, हमारे अंदर कुछ खामियां, कुछ कमजोरियां थीं।’’ इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका का विमोचन किया गया।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामधारी सिंह दिनकर ने जिस तरह से सामाजिक चेतना जगाई और समाज को एकजुट किया, वह अद्वितीय है। अपने कार्यों से उन्होंने लगातार विभिन्न स्तरों पर लोगों को प्रेरित किया और देश की चेतना को मजबूत किया। उन्होंने संस्कृति विभाग को ऐसे साहित्यिक कार्यों को बढ़ावा देने के निर्देश दिये और कहा कि ये आज की पीढ़ी को प्रेरणा देते हैं। उत्सव के तहत शनिवार को स्वामी विवेकानन्द पर आधारित नाट्य प्रस्तुति भी होगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वामी विवेकानंद के बारे में कहा, ‘‘उन्होंने भारत की वैदिक और सनातन परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाई।’’ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 अप्रैल को यहां लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक पर आधारित कार्यक्रम होगा।
सीएम आदित्यनाथ ने कहा,‘‘तिलक जी ने लखनऊ में उद्घोष किया था, ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’, जो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक बड़ी ताकत बन गया। उसी दिन, ‘अटल स्वराजांजलि’ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं पर आधारित एक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। (CM Yogi Adityanath News) हाल ही में, उनका जन्म शताब्दी वर्ष मनाया गया था, और लखनऊ में एक ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ विकसित किया गया है। लखनऊ लंबे समय तक अटल जी की एक कर्मभूमि रही है।’’
सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि, वह स्वामी विवेकानंद की स्मृतियों को नमन करते हैं और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र में गणपति उत्सव के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय चेतना तक पहुंचाया। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया कि आमजन को ऐसी कृतियों से अवगत कराएं। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे, डॉ. सत्यपाल सिंह, राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा, कार्यक्रम संयोजक प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, संस्कृति/पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार, रामधारी सिंह दिनकर के पौत्र ऋत्विक उदयन आदि मौजूद रहे। रामधारी सिंह को उनके उपनाम दिनकर के नाम से जाना जाता है। (CM Yogi Adityanath News) उनका जन्म 23 सितंबर, 1908 को बिहार के मुंगेर जिले में हुआ था। ‘रश्मिरथी’ (1952) दिनकर की मौलिक कृतियों में से एक है। उन्हें 1959 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। दिनकर का 24 अप्रैल 1974 को 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था।
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