हिंदू समाज में जाति और भाषा के आधार पर भेदभाव समाप्त होना चाहिए: आरएसएस नेता नरेन्द्र ठाकुर
हिंदू समाज में जाति और भाषा के आधार पर भेदभाव समाप्त होना चाहिए: आरएसएस नेता नरेन्द्र ठाकुर
लखनऊ, 30 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक नेता ने कहा कि हिन्दू समाज में जाति, भाषा, प्रांत के आधार पर भेदभाव समाप्त होना चाहिए।
आरएसएस के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर ने बृहस्पतिवार को नारद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम में यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘‘ आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा सामान्य यात्रा नहीं है। हमारे कार्यकर्ताओं ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। संघ विश्व में भारत माता की जय जयकार के लिये कार्य करता है। भारत को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाना संघ का उद्देश्य है।’’
ठाकुर ने प्रथम सर संघचालक डॉ. हेडगेवार को याद करते हुए कहा कि संघ व्यक्तिनिष्ठ नहीं, तत्वनिष्ठ बनने में विश्वास करता है और इसीलिये हमने किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि परम पवित्र भगवा ध्वज को गुरु माना।
उन्होंने कहा कि संघ की 85000 से अधिक दैनिक शाखाएं और 32000 से अधिक साप्ताहिक मिलन चल रहे हैं। स्वयंसेवक वनवासी क्षेत्रों से लेकर नगरों तक अनगिनत सामाजिक कार्य कर रहे हैं।
भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन सामाजिक सद्भाव पर विशेष ध्यान देते हुए अपने ‘पंच परिवर्तन’ एजेंडा पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘सामाजिक सद्भाव के माध्यम से हम हिंदू समाज में मौजूद हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त करना चाहते हैं।’
उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष के दौरान, हिंदू सम्मेलनों में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी देखी गई और पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता के महत्व पर जोर दिया गया।
उन्होंने कहा, ‘समाज को ‘स्वयं’ के आधार पर कार्य करना चाहिए, जो भाषा और पहनावे में भी परिलक्षित होना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।’
यूजीसी दिशा निर्देशों को लेकर किये गये एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यह मामला उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन है, इसलिए संघ इस विषय पर अपना कोई मत व्यक्त नहीं करना चाहता, फिर भी हमारा मानना है कि समाज में सद्भाव बना रहना चाहिए।
आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम में आरएसएस के कई पदाधिकारी और वरिष्ठ पत्रकार मौजूद थे।
भाषा मनीष जफर शोभना
शोभना

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