संभल में अवैध मस्जिद के ध्वस्तीकरण के दौरान पोस्टर मिलने पर आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
संभल में अवैध मस्जिद के ध्वस्तीकरण के दौरान पोस्टर मिलने पर आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
संभल, सात जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण के दौरान ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे 49 पोस्टर और पाकिस्तान के झंडे से मिलते-जुलते एक हरे झंडे की बरामदगी के बाद आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, यह मस्जिद कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध निर्माण के रूप में चिन्हित किए जाने के बाद ध्वस्त की गई थी।
इस बीच, समाजवादी पार्टी (सपा) के स्थानीय सांसद जियाउर रहमान बर्क ने संवाददाताओं से कहा, “कसेरऊ मस्जिद में ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे पोस्टर और एक हरा झंडा मिला है। मेरे पास भी ऐसे पोस्टर हैं और मैं भी हरा झंडा रख सकता हूं। इस पर मेरे खिलाफ किस तरह का मामला दर्ज किया जाएगा?”
सांसद ने इस कार्रवाई को “अवैध” बताते हुए कहा कि वह इसके खिलाफ अदालत का रुख करेंगे।
अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तर) कुलदीप सिंह ने बताया कि शनिवार को नखासा थाना क्षेत्र में अवैध मस्जिद को हटाने की कार्रवाई के दौरान परिसर से ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे 49 पोस्टर और पाकिस्तान के झंडे से मिलता-जुलता एक हरा झंडा बरामद किया गया।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने मुतवल्ली (देखरेख करने वाले) जाकिर सहित आठ लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(2) (सार्वजनिक शांति भंग करने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रशासन का दावा है कि मस्जिद का निर्माण कब्रिस्तान के लिए आरक्षित भूमि पर अवैध रूप से किया गया था।
सांसद बर्क ने अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया।
बर्क ने दावा किया कि मस्जिद करीब 150 वर्ष पुरानी है और इसे 1995 में उत्तर प्रदेश गजट में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था, जिसका क्रमांक 1951 है।
आठ लोगों के खिलाफ दर्ज मामले पर नाराजगी जताते हुए सांसद ने सवाल किया कि हरा झंडा रखने या ‘आई लव मोहम्मद’ कहने पर कौन-सी कानूनी धारा लागू होती है।
उन्होंने कहा, “अगर मैं अपने धर्म के दायरे में रहकर अपने अल्लाह और पैगंबर से प्रेम करता हूं तो कौन-सी धारा लागू होती है? किस आधार पर मामला दर्ज किया जाएगा? पुलिस प्रशासन का काम समाज में भय नहीं, बल्कि सुरक्षा और विश्वास कायम करना है।”
वहीं, जिला प्रशासन ने कहा कि ध्वस्तीकरण राजस्व न्यायालयों के निष्कासन आदेशों के बाद किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद लगभग 1,200 वर्ग मीटर कब्रिस्तान भूमि पर बनी थी।
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने बताया कि तहसीलदार अदालत के निष्कासन आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की अपील खारिज कर दी गई, क्योंकि वह अपने दावे के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी।
पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद और भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
भाषा
सं, आनन्द रवि कांत

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