प्रत्येक विश्वविद्यालय को गांवों से जुड़ना चाहिए : आनंदीबेन पटेल

प्रत्येक विश्वविद्यालय को गांवों से जुड़ना चाहिए : आनंदीबेन पटेल

प्रत्येक विश्वविद्यालय को गांवों से जुड़ना चाहिए : आनंदीबेन पटेल
Modified Date: March 7, 2026 / 12:35 am IST
Published Date: March 7, 2026 12:35 am IST

लखनऊ, छह मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश की राज्‍यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को विश्वविद्यालयों को सामाजिक दायित्व निभाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को गांवों से जुड़ना चाहिए।

जनभवन से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार आनंदीबेन पटेल से आज जन भवन में पत्र सूचना कार्यालय के अधिकारियों के नेतृत्व में कर्नाटक एवं त्रिपुरा राज्यों के मीडिया के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की तथा आयोजित संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

राज्‍यपाल ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालयों को सामाजिक दायित्व निभाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को गांवों से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालयों द्वारा पांच-पांच गांव गोद लिए गए हैं, जहां स्वच्छता, वृक्षारोपण, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रतियोगिताओं एवं जनजागरूकता अभियानों का संचालन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों के बच्चों के लिए वस्त्र, साड़ियां एवं पुस्तकें एकत्र कर वितरित की जाती हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के विकास में कुलपति, कुलसचिव तथा सभी कार्मिकों की सामूहिक जिम्मेदारी होती है और सभी के सहयोग से ही संस्थान आगे बढ़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों द्वारा राज्य स्थापना दिवस का भी आयोजन किया जाता है।

राज्यपाल ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु आयोजित ‘एमएएसी मंथन’, ‘शिक्षा मंथन’ तथा वर्ल्ड रैंकिंग से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन समारोहों में विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक 56 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को संसाधन-संपन्न बनाया जा चुका है।

शिक्षा के क्षेत्र में ‘केजी टू पीजी’ की अवधारणा पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि तीन वर्ष के बच्चों का आंगनवाड़ी में शत प्रतिशत नामांकन तथा छह वर्ष की आयु वाले सभी बच्चों का कक्षा एक में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने गुजरात के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां घर-घर सर्वेक्षण करके बच्चों के नामांकन को प्रोत्साहित किया जाता था तथा शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को पुस्तकें वितरित की जाती थीं। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में महिलाओं की साक्षरता दर 35 प्रतिशत से कम थी, वहां बालिकाओं के नामांकन पर ‘नर्मदा बॉन्ड’ के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती थी।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत नामांकन के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु समन्वित प्रयास किए जाने चाहिए।

राज्‍यपाल ने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मानकों पर राज्य विश्वविद्यालयों की रैंकिंग बेहतर हुई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां पूर्ण पारदर्शिता के साथ की जा रही हैं तथा कुलपतियों की नियुक्ति भी निष्पक्ष एवं विवादमुक्त रही है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश में बालिकाओं एवं महिलाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर से बचाव हेतु निःशुल्क टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक लगभग 50 हजार बालिकाओं का टीकाकरण किया जा चुका है।

इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा मीडिया प्रतिनिधियों को जन भवन द्वारा प्रकाशित पुस्तकें ‘हमारा राजभवन’, ‘राजभवन बैंड’, ‘टीबी मुक्त भारत’, ‘आंगनबाड़ी मेरी आत्मा’, ‘चुनौतियां मुझे पसंद है’, ‘लोकहित के मुखर स्वर’ तथा ‘परिवर्तन की सुगंध’ भेंट स्वरूप प्रदान की गईं।

भाषा आनन्द अमित

अमित


लेखक के बारे में