मतदाता सूची में फार्म सात एक वैधानिक पारदर्शी प्रक्रिया, सपा के आरोप निराधार: रिनवा

मतदाता सूची में फार्म सात एक वैधानिक पारदर्शी प्रक्रिया, सपा के आरोप निराधार: रिनवा

मतदाता सूची में फार्म सात एक वैधानिक पारदर्शी प्रक्रिया, सपा के आरोप निराधार: रिनवा
Modified Date: February 18, 2026 / 12:35 am IST
Published Date: February 18, 2026 12:35 am IST

लखनऊ, 17 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिनवा ने मंगलवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नामों को हटाने के लिए फॉर्म सात का उपयोग लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत एक वैधानिक और कानूनी रूप से अनिवार्य प्रक्रिया है।

रिनवा ने यहां पत्रकारों से कहा कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने से संबंधित पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बल्कि अधिनियम के तहत निर्धारित एक कानूनी प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा, “फॉर्म सात का स्पष्ट कानूनी आधार और तर्क है। यह मतदाता सूची संशोधन को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढांचे का हिस्सा है।”

यादव की इस मांग पर कि फॉर्म सात से जुड़ी प्रक्रिया को समाप्त किया जाए, रिनवा ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान, पहले एक मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है और राजनीतिक दलों तथा जनता को इसकी जांच करने का समय दिया जाता है। किसी पात्र मतदाता का नाम छूट गया है, तो उसे शामिल करने के लिए फॉर्म छह जमा किया जा सकता है, जबकि किसी भी प्रविष्टि पर आपत्ति फॉर्म सात के माध्यम से दर्ज की जा सकती है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि राजनीतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंटों द्वारा जमा किए गए प्रपत्र 6 और 7 की संख्या का विवरण देते हुए दैनिक बुलेटिन जारी किए जा रहे हैं।

रिनवा ने स्पष्ट किया कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र का कोई भी पंजीकृत मतदाता फॉर्म सात दाखिल कर सकता है। आवेदक को अपना नाम, ईपीआईसी नंबर, जिस व्यक्ति के खिलाफ आपत्ति उठाई जा रही है उसका विवरण, आपत्ति के आधार और हस्ताक्षर प्रदान करने होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि उचित प्रक्रिया के बिना मतदाता सूची से किसी का नाम नहीं हटाया जाता। आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति और जिसका नाम हटाया जाना है, दोनों को नोटिस जारी किए जाते हैं। संबंधित चुनाव अधिकारी द्वारा जांच की जाती है और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर देने के बाद ही निर्णय लिया जाता है।

उन्होंने बलिया जिले के सिकंदरपुर विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक की पत्नी के साथ-साथ 126 अन्य मतदाताओं के वोट हटाए जाने के आरोप को भी गलत बताया। उन्होंने कहा, ‘विधायक की पत्नी का नाम नहीं हटाया गया है।’

सीईओ ने इसी तरह सकलडीहा, बाबागंज, बिधुना और बलिया विधानसभा क्षेत्रों में गलत तरीके से नाम हटाए जाने के आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।

रिनवा ने कहा कि संशोधन प्रक्रिया के संबंध में राजनीतिक दलों के साथ अब तक पांच बैठकें हो चुकी हैं और उन्हें नियमित रूप से जानकारी दी जाती है, जिसमें ज्ञापन प्रस्तुत किए जाने की जानकारी भी शामिल है।

भाषा किशोर आनन्द रंजन

रंजन


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