शाहजहांपुर में काकोरी के शहीदों की ‘पुरानी’ प्रतिमाओं की पुनःस्थापन को लेकर नया विवाद

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शाहजहांपुर में काकोरी के शहीदों की ‘पुरानी’ प्रतिमाओं की पुनःस्थापन को लेकर नया विवाद

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  • Publish Date - March 28, 2026 / 12:09 AM IST,
    Updated On - March 28, 2026 / 12:09 AM IST

शाहजहांपुर (उप्र), 27 मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में इस बात को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है कि तोड़फोड़ अभियान के बाद फिर से स्थापित की गई काकोरी के शहीदों की प्रतिमाएं नई हैं या मरम्मत की गई पुरानी प्रतिमाएं हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब टाउन हॉल में नगर निगम कार्यालय के बाहर स्थापित अशफाकुल्ला खान, रोशन लाल और राम प्रसाद बिस्मिल सहित स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं को इस सप्ताह के शुरू में बुलडोजर का उपयोग करके कथित तौर पर ध्वस्त कर दिया गया था। क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं को दिखाने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

शुरुआत में नगर आयुक्त विपीन कुमार मिश्र ने कहा था कि नयी प्रतिमाएं लगायी जायेंगी. लेकि पुनर्स्थापना के बाद महापौर ने दावा किया कि पुरानी प्रतिमाओं की मरम्मत की गई और उन्हें फिर से स्थापित किया गया। महापौर के इस दावे को लेकर राजनीतिक विवाद पैदा हो गया।

रुख में बदलाव के बारे में पूछे जाने पर मिश्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उनका पिछला बयान प्रतिमाओं के निरीक्षण से पहले दिया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘निरीक्षण करने पर पता चला कि प्रतिमाएं बरकरार थीं और संगमरमर से बनी थीं, केवल उनकी नींव क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसकी अब मरम्मत कर दी गई है।’’

विपक्ष ने इस कदम पर सवाल उठाया। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रजनीश गुप्ता ने आरोप लगाया कि टूटी हुई प्रतिमाओं को फिर से स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि मान्यता के अनुसार क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं की पूजा नहीं की जाती है और आमतौर पर उन्हें गंगा में विसर्जित कर दिया जाता है।

इस बीच, एक निलंबित सहायक अभियंता मनोज कुमार ने दावा किया कि जब प्रतिमाएं ध्वस्त की गईं तो वह छुट्टी पर थे और जिले से बाहर थे, लेकिन फिर भी उन्हें निलंबित कर दिया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तोड़फोड़ नगर आयुक्त के आदेश पर की गयी। मिश्रा ने आरोप को बेबुनियाद बताया और कहा कि वह जांच के लिए तैयार हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले घटना का संज्ञान लिया था और निष्पादन एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी, जबकि एक कनिष्ठ अभियंता और सहायक अभियंता को निलंबित कर दिया गया था।

रविवार रात को कथित तौर पर प्रतिमाएं तोड़ दी गई थीं। प्रतिमाओं को ढहाते और उनके मलबे को कूड़ेदान में फेंकते हुए दिखाने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिसके बाद लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। स्थानीय कांग्रेस इकाई और एक हिंदू संगठन ने विरोध प्रदर्शन किया।

मंगलवार शाम को शाहजहांपुर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

भाषा सं जफर संतोष

संतोष