उप्र: गोरखपुर में आवारा कुत्तों की निगरानी के लिए माइक्रोचिपिंग प्रणाली शुरू करेगा नगर निगम

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उप्र: गोरखपुर में आवारा कुत्तों की निगरानी के लिए माइक्रोचिपिंग प्रणाली शुरू करेगा नगर निगम

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  • Publish Date - August 9, 2026 / 08:02 PM IST,
    Updated On - August 9, 2026 / 08:02 PM IST

गोरखपुर, नौ अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर निगम (जीएमसी) ने आवारा व बेसहारा कुत्तों की ‘माइक्रोचिपिंग’ के लिए एजेंसी के चयन को लेकर चौथी बार निविदा जारी की है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

पिछले छह महीनों में तीन बार निविदा जारी करने के बावजूद किसी कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई थी।

नगर निकाय को उम्मीद है कि इस परियोजना के लिए 14 अगस्त तक एजेंसी का चयन कर लिया जाएगा।

यह परियोजना पशु प्रबंधन और कल्याण से संबंधित उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में शुरू की जा रही है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रत्येक आवारा कुत्ते के शरीर में एक माइक्रोचिप लगाई जाएगी, जिसमें एक विशिष्ट पहचान संख्या होगी।

निकाय ने बताया कि यह चिप एक डिजिटल डेटाबेस से जुड़ी होगी, जिसमें कुत्ते की नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण, स्वास्थ्य स्थिति और व्यवहार संबंधी इतिहास की जानकारी दर्ज होगी।

अधिकारियों ने बताया कि इस डेटाबेस से नगर निगम को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन कुत्तों की नसबंदी या टीकाकरण पहले ही हो चुका है।

उन्होंने बताया कि इससे एक ही प्रक्रिया दोबारा किए जाने से बचा जा सकेगा और पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रमों की निगरानी बेहतर होगी।

अधिकारियों के मुताबिक, इसमें कुत्तों के आक्रामक व्यवहार से जुड़ी घटनाओं का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा और इससे अधिकारियों को उन इलाकों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां कुत्तों के हमले अधिक होते हैं तथा वहां लक्षित उपाय किए जा सकेंगे।

अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली से नगर निगम को टीकाकरण, उपचार, भोजन उपलब्ध कराने और आश्रय गृहों के प्रबंधन की योजना बनाने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि माइक्रोचिप के रिकॉर्ड के जरिए उन पालतू कुत्तों के मालिकों का भी पता लगाया जा सकेगा, जिन्हें सड़क पर छोड़ दिया गया है।

नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी रॉबिन चंद्रा ने बताया कि डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली से आवारा कुत्तों के स्वास्थ्य, संख्या और व्यवहार का व्यापक रिकॉर्ड रखा जा सकेगा, जिससे उनका प्रबंधन अधिक व्यवस्थित अधिक प्रभावी हो जाएगा।

भाषा आनन्द जितेंद्र

जितेंद्र