आरडब्ल्यूए और फ्लैट मालिकों के विवाद सुलझाने के लिए प्रभावी मंच बनाने पर विचार करे सरकार: अदालत

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आरडब्ल्यूए और फ्लैट मालिकों के विवाद सुलझाने के लिए प्रभावी मंच बनाने पर विचार करे सरकार: अदालत

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  • Publish Date - July 15, 2026 / 10:29 PM IST,
    Updated On - July 15, 2026 / 10:29 PM IST

लखनऊ, 15 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह ‘रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन’ (आरडब्ल्यूए) और आवासीय कॉलोनियों के फ्लैट मालिकों के बीच विवादों के समाधान के लिए एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने पर विचार करे।

पीठ ने कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचा फ्लैट मालिकों और संबंधित आरडब्ल्यूए के बीच उत्पन्न आंतरिक विवादों के समाधान के लिए पर्याप्त नहीं है।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने गोमती नगर विस्तार स्थित सर्वोदय सुलभ अपार्टमेंट के चार निवासियों द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि किसी आवासीय सोसाइटी का प्रबंधन आरडब्ल्यूए की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लिए गए निर्णयों से कुछ फ्लैट मालिकों की असहमति मात्र संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के रिट अधिकार क्षेत्र के प्रयोग का आधार नहीं बन सकती।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि आरडब्ल्यूए ने मनमाने ढंग से 10 में से छह प्रवेश द्वार बंद कर दिए, पार्किंग शुल्क लागू कर दिया और शुल्क जमा नहीं करने वाले निवासियों के वाहनों को रोककर उनसे प्रतिदिन 500 रुपये वसूले।

याचिकाकर्ताओं ने आरडब्ल्यूए के गठन की वैधता पर भी सवाल उठाए।

आरडब्ल्यूए की ओर से अदालत को बताया गया कि चुनाव कराने के बाद उसका विधिवत गठन और पंजीकरण किया गया था।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि एक बार विधिवत निर्वाचित आरडब्ल्यूए अस्तित्व में आ जाए, तो उसे अपने उपनियमों के तहत पार्किंग, सुरक्षा और सामान्य सुविधाओं के प्रबंधन से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार है।

अदालत ने यह भी कहा कि सुरक्षा कारणों से कुछ प्रवेश द्वारों से आवाजाही सीमित करना आरडब्ल्यूए के प्रशासनिक अधिकारों के दायरे में आता है और इससे निवासियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता।

पीठ ने कहा कि इस प्रकार के विवाद मूलतः एसोसिएशन के आंतरिक मामले हैं और उनका समाधान सामान्यतः आरडब्ल्यूए के लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर ही किया जाना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि एसोसिएशन को महत्वपूर्ण निर्णय लागू करने से पहले सदस्यों को पर्याप्त सूचना देनी चाहिए और असहमति रखने वाले सदस्यों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर प्रदान करना चाहिए।

उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट (निर्माण, स्वामित्व और अनुरक्षण का संवर्धन) अधिनियम 2010 के तहत ऐसे विवादों के निपटारे के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था के अभाव का उल्लेख करते हुए पीठ ने राज्य सरकार से फ्लैट मालिकों और आरडब्ल्यूए के लिए उपयुक्त शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने पर विचार करने का निर्देश दिया।

भाषा सं सलीम खारी

खारी