सरकारी अधिवक्ताओं की बीमा योजना के संबंध में जवाब न देने पर उच्च न्यायालय सख्त

सरकारी अधिवक्ताओं की बीमा योजना के संबंध में जवाब न देने पर उच्च न्यायालय सख्त

सरकारी अधिवक्ताओं की बीमा योजना के संबंध में जवाब न देने पर उच्च न्यायालय सख्त
Modified Date: May 12, 2026 / 11:16 pm IST
Published Date: May 12, 2026 11:16 pm IST

लखनऊ, 12 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने सरकारी अधिवक्ताओं के लिए ‘‘ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम’’ तैयार करने के मामले में जवाब दाखिल नहीं करने पर विधि परामर्शी को कड़ी फटकार लगाई है और अंतिम अवसर देते हुए 25 मई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए बीमा योजना लागू करने और संकट सहायता राशि बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया है।

पिछली सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य आया था कि निजी अधिवक्ताओं के लिए बीमा योजना लागू करने में भारी प्रीमियम राशि बड़ी बाधा बन रही है।

पीठ ने 30 मई 2024 को ही विधि परामर्शी से जवाब मांगा था, लेकिन अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि बार-बार आदेश दिए जाने के बावजूद जवाब दाखिल न करना गंभीर विषय है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि अब एक सप्ताह का अंतिम समय दिया जा रहा है और इसके बाद कोई अतिरिक्त समय नहीं मिलेगा।

सुनवाई के दौरान अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पंडित एस. चंद्र ने अदालत को बताया कि संकट सहायता योजना के तहत वित्तीय सहायता बढ़ाने का प्रस्ताव एसोसिएशन की कार्यकारिणी के विचाराधीन है और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से चर्चा के बाद इसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

अदालत को यह भी बताया गया कि ऐसे निजी अधिवक्ताओं के लिए बीमा योजना का प्रस्ताव अब भी लंबित है जो राज्य सरकार से संबद्ध नहीं है। अवध बार एसोसिएशन में वर्तमान में लगभग 14 हजार सदस्य हैं और एक बीमा कंपनी ने प्रति अधिवक्ता 4,999 रुपये वार्षिक प्रीमियम का प्रस्ताव दिया है।

अधिवक्ताओं की ओर से कहा गया कि इतनी अधिक प्रीमियम राशि बीमा योजना लागू करने में बड़ी बाधा बन रही है। प्रस्तावित प्रीमियम के आधार पर कुल राशि करीब सात करोड़ रुपये बैठती है, जिसे वहन करने में एसोसिएशन ने असमर्थता जताई है।

पीठ ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया है।

भाषा सं आनन्द खारी

खारी


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