लखनऊ, तीन सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने गन्ना किसानों के बकाया धन की वसूली न होने पर गंभीर चिंता जतायी है। अदालत ने कहा कि अलग-अलग वसूली प्रमाणपत्र के तहत मूलधन और ब्याज मिलाकर लगभग 1,936 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं।
पीठ ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे संशोधित वसूली प्रमाणपत्र के आधार पर किसानों को देय राशि की अदायगी के लिए हर संभव प्रयास करें।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी.एम. सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 31 अगस्त को यह आदेश पारित किया।
मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को होगी।
अदालत ने ऐसे प्रकरणों पर भी गौर किया, जहां निर्धारित 15 प्रतिशत के बजाय 12 फीसद की दर से ब्याज की गणना करके वसूली प्रमाणपत्र जारी किए गए थे, जिसके कारण लगभग 170 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की वसूली नहीं हो पायी।
पीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चार पूर्व गन्ना आयुक्तों को कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया और उन्हें नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया है कि उच्च न्यायालय के 23 दिसंबर 2021 के फैसले के बावजूद कम ब्याज दर वाले वसूली प्रमाणपत्र क्यों जारी किए गए।
नोटिस में पूर्व अधिकारियों से यह भी बताने को कहा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
अदालत को बताया गया कि संबंधित अवधि के दौरान गन्ना आयुक्त के पद पर रहे चार अधिकारी संजय आर. भूसरेड्डी, प्रभु एन. सिंह, प्रमोद कुमार उपाध्याय और मिनिस्ती एस. थे।
गन्ना आयुक्त द्वारा प्रस्तुत चार्ट के अनुसार, विभिन्न वसूली प्रमाणपत्रों के तहत गन्ना बकाया की मूल राशि लगभग 4,405 करोड़ रुपये थी। इसमें से लगभग 3,318.50 करोड़ रुपये वसूल किए जा चुके हैं जिससे मूलधन के रूप में लगभग 1,087 करोड़ रुपये बकाया हैं।
यह रकम 15 प्रतिशत की दर से ब्याज जोड़कर लगभग 849.52 करोड़ रुपये बनती है लेकिन ब्याज की राशि के लिए अब तक कोई वसूली नहीं की गई है इसलिए, मूल रकम और ब्याज मिलाकर कुल बकाया रकम लगभग 1,936 करोड़ रुपये है।
अदालत के सामने रखे गए आंकड़ों से यह भी पता चला कि वर्ष 2023-24 में राज्य द्वारा तय कीमत (राज्य परामर्शी मूल्य) के आधार पर 36 जिलों में किसानों को लगभग 35,893 करोड़ रुपये के गन्ने का भुगतान किया जाना था, जिसमें से लगभग 17,478 करोड़ रुपये (यानी 48.70%) का भुगतान 14 दिनों की तय समय-सीमा के भीतर किया गया, जबकि लगभग 18,391 करोड़ रुपये (यानी 51.24%) का भुगतान तय समय-सीमा के बाद किया गया।
विलम्ब से किये गये इन भुगतानों पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज लगभग 614.74 करोड़ रुपये बनता है। पीठ ने इस बात पर चिंता जताई कि इस ब्याज का एक भी रुपया अभी तक वसूल नहीं किया गया है।
अदालत ने गन्ना आयुक्त को निर्देश दिया कि वह बताएं कि किसानों का पूरा बकाया कितने समय में अदा होने की संभावना है।
पीठ ने इस बात पर भी स्पष्टीकरण मांगा कि ब्याज की गणना उस तारीख से की जाएगी जब मूल रकम का भुगतान देय हुआ था और वास्तविक भुगतान तक जारी रहेगी या फिर यह गणना केवल वसूली प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख तक ही की जाएगी।
गन्ना आयुक्त को निर्देश दिया गया है कि वह सभी जिलों से बकाया रकम का विवरण इकट्ठा करें और यदि संभव हो तो अगली सुनवाई में अदालत के सामने चीनी मिल-वार विवरण पेश करें।
भाषा सं. सलीम शफीक
शफीक